मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के एक कथित विवादित बयान पर प्रदेशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। आरक्षण पर टिप्पणी करते हुए वर्मा ने कथित तौर पर कहा था, “जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान न कर दे या उससे संबंध न बना ले…” इस बयान के बाद व्यापक विरोध शुरू हो गया है। इस बयान के सामने आने के बाद ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश देखा गया। इसी क्रम में बुधवार को ब्राह्मण एकता मंच के सदस्यों ने जबलपुर के ओमती थाने पहुंचकर आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए एक ज्ञापन सौंपा। ब्राह्मण एकता मंच के पदाधिकारी कपिल दुबे ने इस बयान को पूरे महिला समाज का अपमान बताया। उन्होंने कहा, “बेटियां कोई वस्तु नहीं हैं कि उन्हें दान दिया जाए। यह बयान सिर्फ ब्राह्मण समाज का नहीं, बल्कि पूरे महिला समाज का अपमान है। ऐसे अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।” महिला ब्राह्मण एकता मंच की प्रतिनिधि डॉ कल्पना मिश्रा ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “ब्राह्मण समाज अपनी बेटियों के लिए इस तरह की अपमानजनक भाषा कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। हम परशुराम के वंशज हैं, यदि कोई समाज की बेटियों का अपमान करेगा तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।” समाज के सदस्यों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आईएएस संतोष वर्मा पर कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें उनके पद से हटाया जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में पुरुष और महिलाएं मौजूद थीं। पुलिस ने ज्ञापन प्राप्त कर मामले की जांच का आश्वासन दिया है। अब यह मामला प्रशासन और सरकार के विचाराधीन है कि इस विवादित बयान पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है।


