बुधवार को संविधान दिवस के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह इंदौर आए। उन्होंने यहां संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए कार्यकर्ताओं को शपथ दिलाई। गीता भवन के नजदीक डॉ. भीमराव अम्बेडकर प्रतिमा पर माल्यापर्ण के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दिग्विजयसिंह ने कहा कि आज हमें यह तय करना है कि संविधान ने जो हमें लोकतंत्र दिया है, वो हमें रखना है या नहीं। और इसलिए आज ये हमारे लिए अति महत्वपूर्ण दिन है। हमें यह निर्णय करना है कि देश में एकतंत्र होना चाहिए या लोकतंत्र। लोकतंत्र खतरे में है। मतदाता सूची में छेड़खानी हो रही है और इसे बनाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। चुनाव आयोग अपनी जिम्मेदारी हम पर डाल रहा है। आज तक सर्वे में कभी हमसे प्रमाण नहीं मांगा जाता था। बीएलओ घर आते और पूछताछ के बाद नाम जोड़ देते थे। बिहार के 65 लाख लोगों के नाम काट दिए पूर्व सीएम ने एसआईआर सर्वे पर सवाल उठाते हुए कहा बिहार में करीब 65 लाख लोगों के नाम काट दिए। क्या वे देश के नागरिक नहीं थे। क्या उन्हें एक भी घुसपैठिया बिहार में मिला क्या? भारत के संविधान को एकतंत्र में बदलने का प्रयास है। ये आपकी नागरिकता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। आप कई पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं और आपसे प्रमाण मांग रहे हैं। इसलिए हमें सचेत होने की जरूरत है और संविधान को बचाने के लिए संकल्प लेना है। खतरा हमारे सामने है कि हम देश के नागरिक रह पाएंगे या नहीं, इस देश में लोकतंत्र रह पाएगा या नहीं। हम तो बुजुर्ग हो गए लेकिन एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के हमारे जो कार्यकर्ता हैं उन्हें फर्क पड़ेगा। एकतंत्र में आप जानते हैं न्यायपालिका में सुनवाई नहीं होती, और एक व्यक्ति का राज चलता है। हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं, जो लोकतंत्र के माध्यम से प्रमुख बने फिर लोकतंत्र को खत्म करके फांसीवादी बनकर देश पर कब्जा किया। भारत में भी नरेंद्र मोदी और उनके साथी यही कर रहे हैं। आरएसएस वह संस्था है जिसका पंजीयन तक नहीं हुआ है। इस दौरान दिग्विजयसिंह ने जय भीम, जय संविधान के नारे भी लगाए। कार्यक्रम में दिग्विजयसिंह के साथ राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा, सुरजीतसिंह चड्ढा, चिंटू चौकसे, रघु परमार, अर्चना जायसवाल, विनय बाकलीवाल सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसी मौजूद थे।


