नीमच में बुधवार शाम करीब 4 बजे ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चे और संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन किया। दोनों संगठनों ने एकजुट होकर राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन कलेक्टर प्रतिनिधि को सौंपा, जिसमें केंद्र की मजदूर-किसान विरोधी नीतियों को तत्काल वापस लेने की मांग की गई। ज्ञापन में चार नई श्रम संहिताओं को रद्द करने और नई श्रम शक्ति नीति 2025 के मसौदे को वापस लेने पर विशेष जोर दिया गया है। मजदूरों से संबंधित प्रमुख मांगों में ठेकाकरण समाप्त करना, फिक्स टर्म रोजगार पर रोक लगाना, राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 26,000 रुपए प्रति माह और मासिक पेंशन 10,000 रुपए सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, सभी संगठित, असंगठित श्रमिकों और योजनाकर्मियों को स्थायी करने की मांग भी उठाई गई। किसान संगठनों ने C2+50% फॉर्मूले पर सभी फसलों की खरीद की कानूनी गारंटी (न्यूनतम समर्थन मूल्य), किसानों और खेत मजदूरों के लिए पूर्ण कर्ज माफी और कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने की मांग रखी। संगठनों ने रेलवे, बैंक, बीमा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कोयला, स्टील, बीएसएनएल और बिजली जैसे सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) को समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। बिजली से जुड़ी मांगों में खेती के पंपों के लिए मुफ्त बिजली, घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली और बिजली सुधार बिल 2025 को वापस लेने की बात कही गई है। सामाजिक सुरक्षा के तहत, पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, EPF-95 पेंशनर्स को 9,000 रुपए प्रति माह और अन्य योग्य नागरिकों को 6,000 रुपए मासिक पेंशन देने की मांग की गई है। ग्रामीण विकास के लिए मनरेगा में काम के दिन 200 करने, मजदूरी 700 रुपए प्रतिदिन करने और इसे शहरी क्षेत्रों में भी लागू करने की मांग भी शामिल है। संगठनों ने सामाजिक सौहार्द लागू करने और भारत-ब्रिटेन CETA जैसे व्यापार समझौतों को निरस्त करने की भी मांग की। उन्होंने संविधान के सिद्धांतों के आधार पर इन मांगों पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद जताई है।


