सराफा बाजार में बुधवार रात बड़ा हंगामा हो गया। तय व्यवस्था के अनुसार चौपाटी रात 9.30 बजे बाद शुरू होनी थी, लेकिन संचालक इससे पहले अंदर घुसने लगे तो निगमकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। विवाद बढ़ा तो चौपाटी संचालक विरोध में वहीं धरने पर बैठ गए। निगम ने दो दिन से मुनादी के जरिये ऐलान करवाया था कि सराफा में खाने-पीने की दुकानें रात 9.30 बजे के बाद ही लगाई जाएंगी। फिर भी बुधवार को संचालक रात 8 बजे से ही अंदर जाने की कोशिश करने लगे। निगम की टीमें सराफा में जाने वाले सभी रास्तों पर तैनात थीं और जो भी ठेला या सामग्री लेकर अंदर जाने लगा, उसे रोक दिया गया। कहासुनी बढ़ी और कई संचालक धरने पर बैठ गए। पुलिस की समझाइश के बाद देर रात साढ़े दस बजे चौपाटी शुरू हुई। दो साल पुराना टकराव
पिछले दो साल से सराफा के सोना-चांदी ज्वैलर्स और चाट-चौपाटी संचालकों के बीच टकराव चल रहा है। ज्वैलर्स का तर्क है कि शाम 7 बजे से चौपाटी लगने से कारोबार प्रभावित होता है, क्योंकि ठेलों की वजह से जेवर खरीदने आने वाले ग्राहक बाजार तक नहीं पहुंच पाते। इससे सुरक्षा जोखिम भी बढ़ता है। खासकर सिलेंडर के कारण, जबकि चौपाटी संचालक इसे रोजगार और सराफा की खाद्य संस्कृति से जोड़कर देखते हैं। 2024 से विवाद जारी


