मालवांचल के भक्तों द्वारा अंग्रेजी नए वर्ष में इस बार 12 जनवरी को एबी रोड, राजीव गांधी चौराहा स्थित द मीरा गार्डन पर श्री जीण मैया के मंगल पाठ का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए मथुरा-वृंदावन से बुलवाए जा रहे करीब पांच क्विंटल विभिन्न किस्म के फूलों से पुष्प बंगला बनाने और माताजी के श्रृंगार की तैयारियां की जा रही हैं। स्थानीय सज्जाकार भी पुष्प बंगला श्रृंगारित करने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा 108 फीट लंबे गजरे और 108 फीट लंबी चुनरी से मातारानी की पूजा-अर्चना भी होगी। मालवांचल के करीब 20 जिलों से हजारों श्रद्धालु इस मौके पर आएंगे। पहली बार सभी श्रद्धालु मिलकर 101 थालियों से मातारानी की महाआरती करेंगे। श्री जीण धाम ट्रस्ट की ओर से शिवरतन खंडेलवाल एवं धर्मेश बबलू मित्तल ने बताया कि शहर की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप इस महोत्सव को गरिमापूर्ण बनाने के उद्देश्य से प्रतिदिन आयोजन समिति की बैठकों का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि जीण माता का भव्य मनमोहक दरबार और पुष्प बंगला तो सजेगा ही, सूरत (गुजरात) की प्रख्यात मंगल पाठ वाचिका वर्षा सोनी मातारानी की महिमा का गुणगान भी करेंगी। भजन गंगा भी होगी। मंगल पाठ 12 जनवरी को दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होगा और दरबार के साथ मातारानी की दिव्य अखंड ज्योत भी प्रज्ज्वलित होगी, जिसमें पूरे समय श्रद्धालु कतारबद्ध होकर अपनी आहुतियां समर्पित करेंगे। माताजी को 56 भोग भी समर्पित किए जाएंगे। बैठक में जीण माता चेरिटेबल ट्रस्ट पाटनीपुरा, जीण माता महिला मंडल, पूज्य देवी जीण माता परिवार, जीण माता भक्त मंडल बरूफाटक एवं धामनोद, जीण धाम वार्षिकोत्सव समिति एवं जीण धाम मासिक मंगल पाठ समिति व समस्त भक्तों के सहयोग से हो रहे इस आयोजन के लिए अलग-अलग भक्तों को जिम्मेदारियां भी सौंपी गई है। कार्यक्रम स्थल पर भक्तों के लिए भोजन, बैठक व्यवस्था, वाहन पार्किंग, पेयजल, सुरक्षा, रोशनी, स्वल्पाहार, पूजन सामग्री एवं अन्य तमाम व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली गई हैं। समिति के राजू भाई राधे राधे एवं विक्की मित्तल के अनुसार महोत्सव में आने वाले मातृशक्ति के लिए सुहाग पिटारी की भेंट भी दी जाएगी, जिसमें सिंदूर, मेहंदी, बिंदिया, लाख की चूड़ी, काजल, कुमकुम, चांवल, हल्दी, रोली एवं माताजी के नेग, बिछुड़ी सहित सुहाग की सभी सामग्री शामिल रहेंगी। कार्यक्रम में चरण पादुका स्थल, वातावरण में खुशबू फैलाने के लिए इत्र वर्षा और उत्सव को गरिमापूर्ण बनाने की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।


