लखनऊ के रहमान खेड़ा स्थित केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) परिसर में शुक्रवार शाम बाघ मचान के करीब आ गया। इसके बाद भी वन विभाग की टीम बाघ को पकड़ नहीं पाई। वन विभाग को तीसरी बार बाघ को पकड़ने का मौका मिला था। DFO सितांशु पांडेय ने बताया कि बाघ मचान के काफी करीब आ गया था। मचान से कुछ मीटर की दूरी पर बाघ के पगचिह्न मिले, लेकिन राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTC) की गाइडलाइंस के चलते बाघ को रात में ट्रेंकुलाइज नहीं किया जा सकता है। 6 टीमें बाघ की तलाश कर रही है एक माह से बाघ की दहशत बनी हुई। 20 किमी की एरिया में तीन जिलों के 6 टीमें बाघ को तलाश रही हैं। शुक्रवार सुबह बाघ ने बहरु गांव में बाघ का शिकार किया। अब दुधवा नेशनल पार्क से प्रशिक्षित हथिनी सुलोचना और डायना को बुलाया गया है। वन विभाग की टीम हथिनियों के सहारे बाघ को पकड़ेगी। यह बाघ को ट्रेस करने में ट्रेंड हैं। सूंघकर बाघ की लोकेशन तक पहुंच जाती हैं। सुलोचना और डायना ने संभाला मोर्चा
DFO सितांशु पांडेय ने बताया कि दुधवा नेशनल पार्क से आई दोनों हथिनियां अब हमारे अभियान का हिस्सा हैं। इस ऑपरेशन में कानपुर, पीलीभीत और लखनऊ की टीमें लगी हैं। एक्सपर्ट डॉक्टरों और 30 अधिकारियों की टीम बाघ की हर हलचल पर नजर रख रही हैं। अब तक 5 सफल ऑपरेशन कर चुकी हथिनियां
दोनों हथिनियों ने अब तक 5 ऑपरेशन किए हैं। इन्होंने पीलीभीत, किशन पुर, नगीना रेंज, पलिया और महेशपुर में ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इन दोनों हथिनियों के साथ 4 महावत आए हैं। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार से इन्हें ऑपरेशन में लगाया जाएगा। 30 दिनों से घूम रहा है बाघ
लखनऊ के रहमानखेड़ा जंगल के आसपास 30 दिनों से बाघ घूम रहा है। गाय, नील गाय, जंगली सुअर और पड़वा का शिकार कर चुका है। वन विभाग की 6 टीमें लगी हैं, लेकिन बाघ नहीं पकड़ा जा सका है। गुरुवार को कुशमौरा और गोला कुआं गांव में नए पग चिह्न मिलने और शुक्रवार को शिकार के बाद गांवों में दहशत का माहौल है। SDO हरिलाल ने बताया कि बाघ की सक्रियता वाले एरिया को चिह्नित करके एक किमी एरिया में कॉम्बिंग की गई। 22 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं और दो मचान बने हैं। यहां से वन विभाग की टीम बाघ की मूवमेंट पर नजर रख रही है। आमोठिया गांव में लगा पिंजरा
काकोरी के आमोठिया गांव में भी बाघ की हलचल देखी गई है। ग्रामीणों ने पग चिह्न देखे और वन विभाग को सूचना दी। टीम ने यहां पर पिंजरा लगाया है, जिसमें एक बकरी बांधी गई है। ग्रामीण बोले-, खेती और मजदूरी पर संकट
ग्रामीणों ने बताया कि बाघ की दहशत से मजदूर खेतों में जाने से डर रहे हैं। कुशमौरा के किसान रामप्रताप, खुशीराम और रमेश यादव ने कहा कि आम के बागों में पानी लगाने का समय है, लेकिन बाघ की मौजूदगी से फसल चौपट होने का खतरा है। गोला कुआं गांव के आनंद टिंकू मौर्या ने कहा कि रेलवे पटरी के पास आम के बागों में बाघ के पग चिह्न देखे गए हैं। बाघ की दहशत से परेशान ग्रामीण रात भर जागकर पहरा दे रहे हैं। वन विभाग से अपील की गई है कि जल्द से जल्द बाघ को पकड़कर क्षेत्र को सुरक्षित बनाया जाए। …………………………………. यह भी पढ़ें लखनऊ में रहमान खेड़ा के CISH परिसर में लौटा बाघ:मचान की ओर जाने के पगचिह्न मिले, प्रधान वन संरक्षक ने देखे लखनऊ के रहमानखेड़ा क्षेत्र के गांवों में घूम रहा बाघ एक बार फिर से केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (CISH) परिसर में वापस लौट आया है। मंगलवार सुबह करीब साढ़े 8 बजे पुराने कमांड सेंटर के पास उसके पगचिह्न मिले। यहां बाघ के पैर के निशान ट्रैपिंग केज की तरफ से होते अमरूद की बाग की ओर जाते मिले। पढ़ें पूरी खबर…


