रीवा में खाद्य विभाग के कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी (JSO) विनीत मिश्रा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच अब खुद कलेक्टर करेंगी। शासन ने जांच में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि वे या तो स्वयं जांच करें या किसी आईएएस अधिकारी से यह काम पूरा कराएं। शासन ने 28 नवंबर तक हर हाल में तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने के सख्त आदेश दिए हैं। आरोप है कि अधिकारी की गलत रिपोर्ट के कारण 59 किसानों का भुगतान 10 महीने से अटका हुआ है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उपसचिव बी.के. चंदेल ने 24 नवंबर 2025 को रीवा कलेक्टर को पत्र जारी किया है। इसमें जांच में हो रही देरी को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई है। एडीएम की जांच रिपोर्ट नहीं पहुंचने पर एक्शन
बताया गया है कि जेएसओ विनीत मिश्रा के खिलाफ मिली शिकायतों की जांच पहले अपर कलेक्टर सपना त्रिपाठी को सौंपी गई थी। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी उनका प्रतिवेदन शासन तक नहीं पहुंचा। इसी हीलाहवाली को देखते हुए अब पूरा मामला कलेक्टर के पास भेज दिया गया है। विधायक अभय मिश्रा ने की थी शिकायत
विनीत मिश्रा के खिलाफ शिकायतें सेमरिया विधायक अभय मिश्रा ने की थीं। इनमें भ्रष्टाचार और विभागीय अनियमितताओं से जुड़े कई मामले शामिल हैं। विनीत मिश्रा वर्तमान में सिरमौर, जवा और त्योंथर—इन तीन ब्लॉकों के प्रभारी कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी हैं। गलत रिपोर्ट से 10 महीने से रुका किसानों का पैसा
आरोपों में सबसे बड़ा मामला सेमरिया क्षेत्र के 59 किसानों के करीब दस महीने से रुके हुए भुगतान का है। बताया गया है कि जेएसओ द्वारा गलत जांच प्रतिवेदन भेजा गया था, जिसके कारण भुगतान प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और किसानों का पैसा अटक गया। राशन दुकानों पर प्रभाव और सवालों के घेरे में भूमिका
इसके अलावा, यह भी कहा जा रहा है कि जेएसओ का शहरी क्षेत्र की कई शासकीय राशन दुकानों पर भी खासा प्रभाव है, इसलिए उनकी भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब शासन ने सख्ती दिखाते हुए कलेक्टर से स्पष्ट रिपोर्ट मांगी है। 28 नवंबर तक जांच प्रतिवेदन भेजना अनिवार्य किया गया है, जिससे पूरा मामला तेजी से आगे बढ़ सके।


