कोंडागांव जिले में स्थित कोंडानार गारमेंट फैक्ट्री 323 महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गई है। वर्ष 2022 में स्थापित यह फैक्ट्री अब जिले की पहचान बन चुकी है, जहां महिलाएं अत्याधुनिक सिलाई मशीनों पर काम कर रही हैं। इस फैक्ट्री में नक्सल प्रभावित परिवारों की महिलाएं और दिव्यांग युवतियां भी शामिल हैं, जिन्हें रोजगार के अवसर मिले हैं। यह फैक्ट्री उनके लिए उम्मीद की नई किरण साबित हुई है। दिव्यांग युवती प्यारी भोयर ने बताया, “मैं पैरों से पूरी तरह निशक्त हूं। पहले घर में कोई काम नहीं कर पाती थी और खुद को बोझ समझती थी। यहां गारमेंट्स की पैकिंग का काम मिलने से अब मैं अपने परिवार का सहारा बन गई हूं। यह रोजगार मुझे एक नई पहचान दे रहा है।” महिलाओं की कमाई और आत्मनिर्भरता उनकी बहन ज्योति भोयर भी इसी फैक्ट्री में काम कर आत्मनिर्भर बनी हैं। फैक्ट्री संचालक परमेश्वर वर्मा के अनुसार, पिछले तीन वर्षों से 323 महिलाएं लगातार काम कर रही हैं। प्रत्येक महिला प्रतिमाह 8,000 से 11,000 रुपए कमा रही है। उत्पाद गुणवत्ता से फैक्ट्री की बढ़ती पहचान फैक्ट्री के उत्पादों की गुणवत्ता को देखते हुए कोलकाता की डीसी कंपनी ने रायपुर में अपना नया स्टोर भी खोला है। फैक्ट्री द्वारा हर महीने 20 से 25 लाख रुपए का वेतन भुगतान किया जाता है, जो इसके बड़े रोजगार स्रोत होने का प्रमाण है। कलेक्टर ने महिलाओं की लगन की सराहना कलेक्टर नूपुर राशि ने महिलाओं के इस जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह फैक्ट्री जिले की पहचान बन गई है। यहां की महिलाओं की लगन ने उन्हें इतना कुशल बना दिया है कि उनके बनाए गारमेंट अब पूरे देश में भेजे जा रहे हैं। नक्सल पीड़ित और दिव्यांग महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का मंच कलेक्टर ने आगे कहा कि नक्सल पीड़ित परिवारों और दिव्यांग महिलाओं का यहां आत्मनिर्भर होना सबसे बड़ी उपलब्धि है। कोंडानार गारमेंट फैक्ट्री केवल एक उत्पादन इकाई नहीं, बल्कि 323 महिलाओं के सपनों, मेहनत और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।


