कांकेर के ग्राम कच्चे में पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महापुराण कथा के पहले दिन प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि गलत संगत मनुष्य के जीवन को नष्ट कर देती है, जबकि सुसंगत से जीवन संवरता है। इसलिए संगति का चयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। पंडित मिश्रा ने प्रदोष काल में की गई स्तुति और दीपदान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इससे करोड़ों पुण्य प्राप्त होते हैं और पापों का नाश होता है। उन्होंने पराई नारी और पराए धन से दूर रहने की भी सीख दी। भानुप्रतापपुर तहसील के ग्राम कच्चे में यह सात दिवसीय शिव महापुराण कथा 26 नवंबर से शुरू हुई है, जो 2 दिसंबर तक चलेगी। कथा के प्रथम दिवस पर पंडित मिश्रा ने शिव आराधना और आस्था के महत्व को समझाया। उन्होंने देवराज ब्राह्मण की कथा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे गलत साथियों के कारण व्यक्ति का जीवन बिगड़ जाता है। सुबह की प्रार्थना और शाम की आराधना कभी व्यर्थ नहीं जाती। एक लोटा जल भी जीवन की बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान कर सकता है। संत रविदास की कथा का उल्लेख पंडित मिश्रा ने बताया कि ईश्वर को पाने के लिए लोग दिशाओं में भटकते रहते हैं, जबकि बाबा स्वयं भक्तों के बहुत निकट रहते हैं। बस मन से सच्चे भाव से पुकारने की आवश्यकता है। उन्होंने संत रविदास की कथा का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्ची भक्ति से मां गंगा भी प्यासे भक्त की प्यास बुझाने कटौती में प्रकट हो जाती हैं। बुरे समय में अपनों के बदल जाने पर उन्होंने धैर्य रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे वक्त में बाबा को एक लोटा जल अर्पित कर उनके चरणों में निवेदन करें, तो जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और रास्ते स्वयं बन जाते हैं। उन्होंने सनातन धर्म को बचाने और उसकी संस्कृति को जीवित रखने के लिए सभी को एकजुट रहने का आह्वान किया। भंडारा, चिकित्सा और सुरक्षा की व्यापक व्यवस्था कथा स्थल के पास भक्तों के लिए भंडारा, भोजन और चिकित्सा शिविर की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई है। पुलिस-प्रशासन की ओर से जगह-जगह बेरिकेड्स लगाकर यातायात नियंत्रित किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। कथा स्थल बन जाता है कैलाश धाम कथा वाचक ने कथा स्थल के दिव्य महत्व पर कहा कि जहां कथा होती है, वह स्थान कैलाश धाम का स्वरूप धारण कर लेता है। यदि कोई भक्त वहां की मिट्टी तक अपने शरीर से स्पर्श कर ले, तो उसके भी जीवन के दुख दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आज हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में दुखी है, लेकिन शिव आराधना, भजन और प्रार्थना ही वह मार्ग है जो मनुष्य को सच्चा सुख प्रदान करता है।


