किसानों को पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से एक लघु फिल्म “अन्नदाता से ऊर्जादाता: जबलपुर में नई क्रांति” का विमोचन किया गया। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग जबलपुर द्वारा निर्मित इस 4 मिनट 44 सेकंड की फिल्म को कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह ने मंगलवार को जारी किया। फिल्म में पराली के वैकल्पिक उपयोग, पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के तरीके दर्शाए गए हैं। साथ ही नवीन तकनीक अपनाकर पराली प्रबंधन में सफलता पाने वाले किसानों के अनुभव भी शामिल किए गए हैं। जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा फिल्म जारी करते समय कलेक्टर सिंह ने कहा कि पराली जलाने की समस्या खत्म करने में जागरूकता अभियान बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह फिल्म किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि फिल्म को जिलेभर के किसानों तक पहुंचाया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसान इससे लाभान्वित हो सकें। कार्यक्रम में उप संचालक कृषि डॉ. एसके निगम, सहायक संचालक कृषि रवि आम्रवंशी और अनुविभागीय कृषि अधिकारी पाटन डॉ. इंदिरा त्रिपाठी मौजूद रहे। पराली प्रबंधन के लिए जिले में बड़े कदम जबलपुर जिले में लगभग 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है। पराली जलाने को रोकने और संसाधन के रूप में उपयोग बढ़ाने के लिए कृषि विभाग निरंतर प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार अभियान चला रहा है। इस वर्ष जिले में दो निजी एग्रीगेटर क्रॉप साइकिल बायोमास प्राइवेट लिमिटेड और फार्मवाट किसानों के खेतों से पराली को बेल्स के रूप में एकत्र कर रिलायंस बायो एनर्जी प्लांट भेज रहे हैं। यहां पराली से कम्पोस्ट, बायोगैस और जैविक प्रोम खाद तैयार की जाती है। दोनों एग्रीगेटर का लक्ष्य 35 हजार एकड़ क्षेत्र से पराली संग्रहित करने का है। पराली जलाने से गंभीर नुकसान उप संचालक कृषि डॉ. एसके निगम ने बताया कि 1 टन पराली जलाने से 7 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड, 2 किलो सल्फर डाइऑक्साइड और 199 किलो राख पैदा होती है, जो पर्यावरण और मिट्टी की उर्वरता दोनों को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने से बचें और वैकल्पिक प्रबंधन तकनीक अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करें।


