सिरोही में भारतीय संविधान के 76वें स्थापना दिवस पर सिरोही में बहुजन समाज के विभिन्न संगठनों ने संयुक्त रूप से एक कार्यक्रम आयोजित कर गरिमापूर्ण तरीके से दिवस मनाया। कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई। इसके बाद उपस्थित लोगों ने संविधान की प्रस्तावना की सामूहिक शपथ ली। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय मूलनिवासी बहुजन कर्मचारी संघ ट्रेड यूनियन के सीईसी सदस्य एवं बामसेफ प्रदेश महासचिव (समन्वय) तोलाराम ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संविधान हमारा जीवन, सम्मान और अस्तित्व है, जिसे बचाना हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने फुले-शाहू-अंबेडकर मिशन को आगे बढ़ाने के लिए समाज में एकजुटता पर जोर दिया। मुख्य वक्ता एडवोकेट सुंदरलाल मोसलपुरिया, जिला संयोजक, बहुजन क्रांति मोर्चा सिरोही ने कहा कि आज संविधान विभिन्न खतरों से घिरा हुआ है, इसलिए सड़क से संसद तक संघर्ष की आवश्यकता है।माधोसिंह देवड़ा, अध्यक्ष, क्षत्रिय मूलनिवासी महासंघ और कपड़ा व्यापार संघ ने कहा कि महापुरुष किसी एक वर्ग के नहीं होते, उन्होंने सभी को समान अधिकार देने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने सिरोही से संदेश दिया कि क्षत्रिय मूलनिवासी समाज संविधान की रक्षा के लिए मजबूती से खड़ा है। सुरेश कुमार नोगिया, प्रदेश प्रभारी, सात विंग, राष्ट्रीय मूलनिवासी बालक बालिका संघ ने मनुस्मृति और संविधान की तुलना करते हुए कहा कि मनुस्मृति जन्म से गुलामी थोपती थी, जिसमें शूद्रों को पढ़ने, संपत्ति और सम्मान का अधिकार नहीं था। इसके विपरीत, बाबासाहेब का संविधान सबको समान अधिकार देता है और कानून के समक्ष कोई ऊँच-नीच नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो आज संविधान को कमजोर करना चाहते हैं, वे मनुस्मृति थोपने का प्रयास कर रहे हैं, जिसे समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा। कार्यक्रम में हिम्मताराम राठौड़ (पूर्व जिला अध्यक्ष बामसेफ), देवाराम रांगी (व्याख्याता, राजस्थान शिक्षक संघ अम्बेडकर), मदनलाल चौहान (राष्ट्रीय प्रचारक बामसेफ), फूलाराम जोगसन, नेताराम मेघवाल, लक्ष्मण सिंह देवड़ा (ग्राम विकास अधिकारी) सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान संविधान बचाओ, अधिकार बचाओ के नारे गूंजते रहे।


