सारा संसार कर्म की मुट्ठी में है, तुम्हारी मुटठी में कुछ भी नहीं, जीवन” क्या है? पानी की बूंद के समान, उसके लिए इतनाअधिक तामझाम क्यों? जब एक श्वांस पर भी तुम्हारा अधिकार नहीं, सुख दुःख, संयोग वियोग, मान-अपमान, अनुकूल-प्रतिकूल संयोग सभी कर्माधीन हैं, तो उसे स्वीकार करो, कर्म की इस व्यवस्था को समझ जाओगे तोआपका सारा दुःख और प्रलाप मिट जाएगा तथा समता आ जाएगी। मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज ने छत्रपति नगर दलाल बाग में इंदौर में आयोजित धर्म सभा में यह बात कही। मुनिश्री ने कहा कि जब बुरा वक्त आए तो प्रयास करो, उससे ज्यादा जूझो मत। जैसे समय की धार से जूझने वाला तिनका क्षत-विक्षत किनारे तक पहुंच जाता है जबकि समय की धारा के साथ जो तिनका आगे बढ़ता है, वह अपने लक्ष्य को पाकर समुद्र में मिल जाता है। व्यक्ति अपने जीवन व्यवस्था से संतुष्ट नहीं धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि मुनिश्री ने कहा कि आज हर व्यक्ति अपने जीवन व्यवस्था से संतुष्ट नजर नहीं आता। उसकी दृष्टि हमेशा दूसरों की ओर रहती है, उसके पास इतना क्यों? मेरे पास क्यों नहीं? राग-द्वेष करने से कुछ नहीं मिलता, वह चित्त को और बेचैन करता है, संत कहते हैं कि “प्राप्त को यदि पर्याप्त मान लोगे तो राग-द्वेष से बच जाओगे। मुनिश्री ने कहा आप लोग “मेरी भावना” में पड़ते हैं “होकर सुख में मग्न न फूले, दुःख में कभी न घबराए, पर्वत, नदी-श्मशान-भयानक, अटवी में नहिं भय खाए” इन्हीं दोनों लाइन में संपूर्ण अध्यात्म का रहस्य छिपा हुआ है। मुनिश्री ने समझ, स्वीकार, श्रद्धान और समता पर चर्चा करते हुए कहा कि “समझ” जब आध्यात्मिकता के साथ आती है, तो “श्रद्धान” पक्का होता है, जब श्रद्धान को मन से स्वीकार कर लोगे तो आपके अंदर स्वतः समता आ जाएगी तथा पर पदार्थों के प्रति ममत्व भाव समाप्त हो जाएगा। कोई आपको आपकी श्रद्धा से डिगा नहीं पाएगा मुनिश्री ने कहा कि तत्व के प्रति पक्का श्रद्धान होगा और संसार की विचित्रता को समझोगे तो प्रतिकूल संयोग में भी कोई आपको आपकी श्रद्धा से डिगा नहीं पाएगा और यदि श्रद्धान आपका कमजोर होगा तो आप टोना टोटका तथा अंधविश्वास के शिकार होकर इधर उधर भटक जाओगे। इस अवसर पर मुनि निर्वेगसागरजी महाराज, मुनि संधान सागर जी महाराज सहित समस्त क्षुल्लक गण मंचासीन रहे। भूमिपूजन और शिलान्यास 15 दिसंबर को राजेश जैन दद्दू ने बताया आज की धर्मसभा का शुभारंभ महोत्सव के सोधर्म इंद्र परिवार के भूपेंद्र साधना जैन, नरेंद्र नायक, कमल जैन एवं ट्रस्ट के कार्य अध्यक्ष डॉ. जैनेन्द्र जैन, महामंत्री विपुल बाझल ने मांगलिक क्रिया सम्पन्न की। 14 दिसंबर को प्रातः 7:30 से 8:45 तक “भावनायोग” होगा। 15 दिसंबर को मुनिसंघ रेवतीरेंज में आयोजित सहस्त्रकूट जिनालय के पुण्यार्जक नरेंद्र कुमार जैन, आजाद कुमार जैन, अशोक कुमार जैन, डॉ. राकेश राजीव जैन द्वारा भूमिपूजन किया जाएगा। शिलान्यास समारोह दोपहर एक बजे से प्रारंभ होगा। उपरोक्त कार्यक्रम मुनि विनम्र सागरजी महाराज ससंघ सानिध्य में दोपहर एक बजे से होगा।


