जालंधर| विजिलेंस ने जालंधर नगर सुधार ट्रस्ट के मुलाजिम संजीव कालिया पर 2 प्लॉटों में अनियमितता के आरोप में 2 दिन पहले एफआईआर की है, लेकिन केवल यही मामला नहीं है जिसकी जांच विजिलेंस कर रही है। जालंधर नगर सुधार ट्रस्ट के अलग से 5 प्लॉटों की भी स्कैनिंग हो रही है। इसमें कमियां पाए जाने पर ट्रस्ट के बाकी मुलाजिमों-अफसरों पर भी गाज गिर सकती है। नवंबर में विजिलेंस ने जालंधर नगर सुधार ट्रस्ट से इन प्लॉटों के बारे में रिकार्ड मंगवाया था। जालंधर नगर सुधार ट्रस्ट के जानकार बताते हैं कि सारा कामकाज मेन्युअल है। दफ्तर में कंप्यूटर जेनरेटर डाक्यूमेंट्स नहीं होते हैं। हर फाइल क्लर्कों से लेकर कार्यकारी अधिकारी तक जाती है। राजनीतिक नियुक्ति वाले चेयरमैन के दफ्तर में भी फाइलें जाती हैं, जिन्हें लेकर मौखिक आदेश भी होते हैं। यही वजह से सरकारी खजाने में कम पैसा जमा होने, गलत शख्स के नाम पर प्लॉट अलॉट होने, लैंड इनहांसमेंट आदि की रकम जमा न होने का अंदेशा बढ़ जाता है। अलग-अलग शिकायतों के बाद विजिलेंस को प्लाटों की जांच सौंपी गई थी। पांच प्लॉटों में सूर्या एनक्लेव में स्थित 356 बी-1, 552-बी और 94.7 एकड़ सूर्या एनक्लेव के प्लॉट नंबर 31सी, 32सी, 43सी शामिल हैं।


