जयपुर उल्टी गंगा बहने की कहावत यूडीएच में चरितार्थ हो रही है। विभाग के आदेश से बांटे गए पट्टों पर विभाग ने ही मान्यता के सवाल उठा दिए हैं। प्रदेश के पिछली सरकार में गठित किए 9 जिलों और 3 संभागों को एक झटके में समाप्त करने के बाद अब गहलोत राज में बांटे गए 10.91 लाख पट्टों की मान्यता खतरे में आ गई है। विकास प्राधिकरणों, यूआईटी, निगम और पालिकाओं ने यूडीएच और स्वायत्त शासन विभाग के आदेश से ही पट्टे जारी किए। अब उन पट्टों की मान्यता को लेकर नगरीय विकास विभाग ने ही सवाल खड़े कर दिए हैं। एक दो नहीं बल्कि करीब 94 निकायों द्वारा जारी किए पट्टे खारिज हो सकते हैं। असल में रिअल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी राजस्थान ने आपत्ति की है कि संस्था की मान्यता बिना कोई कॉलोनी का पट्टा नहीं दिया जा सकता। ऐसे पट्टे रद्द होने चाहिए। अब पूरा विभाग और निकाय परेशानी में हैं कि क्या रास्ता निकाला जाए। असल में 2017 में बने रेरा के गठन से नियम है कि नियमन के लिए रेरा की मुहर जरूरी है। लेकिन बिल्डर और निकाय रेरा से रजिस्ट्रेशन पत्र नहीं ले रहे और न ही कॉलोनियों व जमीनों का पंजीयन करवा रहे हैं।


