शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति की मांग:नवीन शिक्षक संघ ने दुर्ग में निकाली पदयात्रा, सौंपा ज्ञापन

नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ ने गुरुवार को दुर्ग में शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त करने की मांग को लेकर पदयात्रा सत्याग्रह किया। यह पदयात्रा शिक्षा विभाग कार्यालय से शुरू होकर शिक्षा मंत्री के शासकीय आवास तक पहुंची। प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत के नेतृत्व में संघ के सैकड़ों शिक्षक इस पदयात्रा में शामिल हुए। उन्होंने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। शिक्षा मंत्री की अनुपस्थिति के कारण ज्ञापन उनके कार्यालय में जमा किया गया। संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि मुख्यमंत्री ने शिक्षा सत्र 2025-26 को ‘मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता वर्ष’ घोषित किया है। इसके बावजूद, बड़ी संख्या में शिक्षकों को ऐसे कार्यों में लगाया जा रहा है जिनका शिक्षा से सीधा संबंध नहीं है। राजपूत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट और शिक्षा विभाग दोनों ने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक जिम्मेदारियां न सौंपने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। हालांकि, विभागीय अधिकारी लगातार इन निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को लगातार बाढ़-आपदा राहत, गिरदावरी, स्वास्थ्य विभाग के सर्वे, राजस्व विभाग के काम, जाति प्रमाणपत्र सत्यापन, आधार जेनरेशन, अपार आईडी और आवारा कुत्तों की निगरानी जैसे कार्यों में भेजा जा रहा है। इससे शिक्षा का स्तर गिर रहा है और बच्चों को भारी नुकसान हो रहा है। विकास सिंह राजपूत ने जोर दिया कि जब शिक्षक अपनी मूल भूमिका—कक्षा शिक्षण—से दूर रहते हैं, तो स्वाभाविक रूप से परीक्षा परिणाम भी कमजोर होते हैं और फिर उसी शिक्षक को दोषी ठहरा दिया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर एक बच्चा पढ़ाई से वंचित रह जाता है, तो उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता। राजपूत ने मांग की कि शिक्षक और बच्चे मिलकर ही राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में अव्वल बना सकते हैं, बशर्ते शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कामों से मुक्त रखा जाए। संघ की प्रदेश प्रवक्ता और शिक्षिका गंगा शरण ने बताया कि शिक्षकों की सबसे बड़ी समस्या यही है कि उन्हें पढ़ाने का समय ही नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा- शिक्षा विभाग बार–बार गुणवत्ता सुधारने की बात करता है, लेकिन स्कूलों में विषय–विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। मेरी स्कूल में 10 साल से इतिहास का शिक्षक नहीं आया है। दूसरे विषय वाले शिक्षक इतिहास पढ़ा रहे हैं, ऐसे में गुणवत्ता कैसे आएगी?” उन्होंने कहा कि युक्तियुक्तकरण (rationalisation) के बावजूद कई स्कूलों में वर्षों से विषय विशेषज्ञ नहीं भेजे गए, और जो शिक्षक हैं उन्हें शिक्षण के बजाय अन्य विभागों के कामों में लगा दिया जाता है। मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के सपने को पूरा करने के लिए हमें पढ़ाने का समय चाहिए संघ का कहना है कि राज्य सरकार शिक्षा गुणवत्ता को लेकर गंभीर है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब शिक्षकों को पूरी तरह से शिक्षण पर ध्यान देने दिया जाए। गंगा शरण ने कहा- हमारा उद्देश्य सरकार का विरोध नहीं है। हम चाहते हैं कि शिक्षक अपना मूल कार्य करें और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। इसके लिए जरूरी है कि हमें अन्य कार्यों से मुक्त किया जाए।” अधिकारी निर्देशों की अवहेलना कर रहे-संघ ने तत्काल कार्रवाई की मांग की ज्ञापन में शिक्षक संघ ने शिक्षा मंत्री से अनुरोध किया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएँ कि शिक्षकों को किसी भी तरह के गैर–शैक्षणिक कार्यों में शामिल न किया जाए। संघ ने कहा कि यदि शिक्षकों पर बोझ कम किया गया और उन्हें सिर्फ पढ़ाने का अवसर दिया गया, तो आने वाले एक वर्ष में शिक्षा परिणामों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *