बड़वानी जिला मुख्यालय पर कन्या महाविद्यालय की छात्राओं के कचरा ग्राउंड परिसर में छात्रावास बनवाया गया। हालांकि यह तीन साल से महज शोपीस बना हुआ है। शुक्रवार को इस मामले को लेकर एक बार फिर छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंची। छात्राओं ने कार्यालय में ज्ञापन सौंपकर जल्द ही छात्रावास शुरू करवाने की मांग की है। कुछ महीने पहले इंदौर डिवीजन हायर एजुकेशन के एडिशनल डायरेक्टर ने कन्या छात्रावास का निरीक्षण किया था। उन्होंने कहा था कि कचरा ग्राउंड के पास गंदगी-बदबू फैलने से छात्रावास भवन छात्राओं के रहने लायक नहीं है। साथ ही छात्रावास के साथ बाउंड्रीवाल, अधीक्षिका और गार्ड के कक्ष नहीं बनाए जाने पर उन्होंने हैरानी जताई थी। उन्होंने पूरी जानकारी लेकर उच्च स्तर पर समीक्षा बैठक में मुद्दा उठाकर निराकरण की बात कही थी। हालांकि अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। छात्रावास शुरू करने को लेकर छात्राएं कई बार आवेदन-ज्ञापन सौंपकर धरना प्रदर्शन कर चुकी है। पार्ट टाइम जॉब करने को मजबूर छात्राएं कन्या महाविद्यालय में शहर के अलावा जिले के ग्रामीण अंचल से आर्थिक रूप से कमजोर किसान, मजदूर और आदिवासी समुदाय की छात्राएं उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए आती हैं। लेकिन यहां रहने के लिए छात्रावास सुविधा नहीं मिलने पर मजबूरी में किराए के कमरे लेकर रहना पड़ता है। ऐसे में किराया अधिक होने और मकान मालिकों के एडवांस में किराया लेने सहित अन्य आर्थिक दिक्कत आती है। अभिभावकों पर आर्थिक बोझ न पड़े इसलिए छात्राएं रूम किराया भुगतान के लिए दुकानों पर पार्ट टाइम जॉब करने को मजबूर है। जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। रविना भादलिया ने बताया कि मैं बीए फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट हूं। शहर में किराए के कमरे में रहती है। किराया अधिक होने के साथ महीने खत्म होने के पहले ही देना पड़ता है। अभिभावक खेती-मजदूरी करते है, उन पर आर्थिक भार पड़ता है। आवास भत्ता भी समय पर नहीं मिलता है। परीक्षा के बाद मिलता है। ऐसे में दुकानों पर पार्ट टाइम जॉब कर किराया भरना पड़ती है। छात्रावास शुरू हो जाए तो सुविधा मिलेगी। कॉलेज में बीएससी चतुर्थ की संजना चौहान ने कहा कि छात्रावास शुरू करने के लिए आवेदन देने आए है। पूर्व में कई बार आवेदन दिए और धरने किए, लेकिन हर बार कोरे आश्वासन मिलते है। तीन साल से छात्रावास बन चुका है तो उसमें सुविधाएं और सुरक्षा के इंतजाम कर संचालन शुरू करना चाहिए। ताकि ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को रहने की सुविधा मिल सके। कॉलेज प्रशासन से भी मांग करते है, लेकिन छात्रावास शुरू नहीं हो पा रहा।


