जयपुर के वैशाली नगर थाने की SI हेमलता शर्मा ने मिसेज इंडिया ग्लैम सीजन- 6 का खिताब अपने नाम किया है। 2015 में पुलिस डिपार्टमेंट में शामिल हुई हेमलता के लिए ये पहला मौका था, जब वे रैंप पर उतरीं। खिताब अपने नाम करने के बाद SI ने अपनी इस पूरी जर्नी को भास्कर के साथ शेयर किया। उन्होंने बताया- लड़कियों को लड़के फब्तियां कसते थे। तब सोसायटी के लोग मेरे पेरेंट्स को कहते थे कि लड़कियां पैदा ही नहीं होनी चाहिए। ऐसे लोगों को जवाब देने के लिए कुछ बड़ा करने का सोचा। पुलिस भर्ती से पहले ही शादी हो चुकी थी और एक बेटा भी था। रात में ड्यूटी रहती और बिजनेस के सिलसिले में पति मनीष कुमार बाहर रहते थे। कई बार ऐसा होता था कि बेटे को लॉक करके जाना पड़ता था। हम मां-बेटे कई बार भूखे ही रहे हैं। जब पति घर होते, तब वे बेटे को संभालते थे। अब बेटा 17 साल का हो गया है। मिस इंडिया ग्लैम के सफर को लेकर बताया- ड्यूटी के दौरान इसका ऑफर मिला था। इसके बाद रोजाना 2 घंटे इसके लिए प्रैक्टिस की और 15 पार्टिसिपेंट्स को पछाड़ कर सीजन- 6 का ये खिताब अपने नाम किया। पढ़िए ये खास इंटरव्यू… सबसे पहले हम आपकी पुलिस से जुड़ी जर्नी को जानना चाहेंगे, क्या आप पुलिस में ही जाना चाहती थी ? मैंने अपनी कॉलेज की पढ़ाई महारानी कॉलेज से की है। वहां उर्वशी मैडम थी, उन्हें देखकर लगा कि मुझे टीचिंग लाइन में ही जाना हैं। मैंने इसके लिए बीएड की और दो से तीन बार अलग-अलग एग्जाम भी दिए लेकिन सिलेक्शन नहीं हुआ। फिर ऐसा लगा कि कुछ ऐसे प्रोफेशन में जाना चाहिए, जहां आप सोसायटी में अलग दिखो। उस समय एक सीरियल चलता था-चंद्रमुखी चौटाला वाला एफआईआर। वो मेरे लिए बड़ी इंस्पिरेशन थी। जब उन्हें देखती तो मैं भी सोचती कि मैं इस तरह की वर्दी पहनूंगी तो कैसा लगेगा। मेरे पेरेंट्स को भी मेरे नाम से जाना जाएगा। इसके बाद मैंने ठान लिया कि पुलिस डिपार्टमेंट जॉइन करना है। मैंने तैयारी की और एग्जाम दिया। इसे लेकर एक बात कहना चाहती हूं कि आज भी हमारी सोसायटी में लड़कियों को मोटिवेट नहीं किया जात है। जब मैं अपने पेरेंट्स के साथ रहती थी तब सोसायटी के कुछ लोगों ने कमेंट्स कर ये कहा था कि लड़कियां नहीं होनी चाहिए। तब मेरे पिता ने भी उस वक्त कहा था कि इसलिए मैं नहीं चाहता था कि बेटियां पैदा हो। उस दिन सोच लिया था कि मुझे कुछ ऐसा करना है कि मेरे माता-पिता गर्व करे और वे मेरे नाम से जाने जाए। शादी, बच्चे और कोचिंग को कैसे मैनेज किया ? जब मैंने एग्जाम की तैयारी शुरू कि तो मेरा बेटा छोटा था। उस समय कोचिंग जाने के लिए मैं अपने बच्चे को मेरे पेरेंट्स के पास छोड़कर जाती थी। बच्चा रोता रहता था लेकिन मेरी मजबूरी थी कि कोचिंग और पढ़ाई के लिए मुझे उसे छोड़ना ही पड़ता था। जब जयपुर में कोचिंग पूरी हुई तो पंजाब चले गए। वहां सेंट जेवियर्स स्कूल जॉइन किया। ये वो दौर था- जब मैं अपने आप में काफी कन्फ्यूज थी। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना है और क्या नहीं। मुझे याद है- मैं पांचवीं क्लास को पढ़ा रही थी। इसी दौरान एक प्रार्थना की लाइन सुनने को मिली, जो थी- पाप क्षमा कर जीवन दे दे, क्षमा की याचना करूं…। ये लाइन सुनकर मैं इतनी भावुक हो गई कि क्लास पूरी होने के बाद मैं रोने लगी। तब मुझे ऐसा लग रहा था कि जीवन में ऐसा क्या किया है कि इतनी बड़ी सजा मिल रही है। जब मैंने एग्जाम दिया तो कई बार मन में ये ख्याल आता कि सिलेक्शन नहीं होगा और कई बार मुझे सपने में वर्दी पर स्टार लगे हुए नजर आते थे। पुलिस में 24 घंटे की जाॅब रहती है, बेटा छोटा था। जब फोर्स जाॅइन की तो क्या चुनौतियां मिली आपको ? सिलेक्शन होने के बाद आगे का सफर इतना आसान नहीं था। मेरी ट्रेनिंग का वक्त आया तो मेरा बेटा छोटा था। कई बार पति उसे संभालते और उसका ध्यान रखते थे। इसके बाद जब पोस्टिंग मिली तो चुनौतियां बढ़ने लगी। रात में कई बार मेरी ड्यूटी लगी। ऐसे में घर को बाहर लॉक करके जाती और अंदर बेटा रहता था। किसी ऐसे केस बारे में बताएं, जिसको आपने सॉल्व किया हो और वह आपके लिए भी एक यादगार पल रहा हो? कुछ दिनों पहले वैशाली नगर थाने में एक महिला ने शिकायत दर्ज करवाई कि लिफ्ट देने के बहाने उसके साथ गलत किया गया। जब इसकी जांच की तो पता चला कि वह खुद लिफ्ट के बहाने लोगों को रोकती और रुपए के लिए टॉर्चर करती। जब मामले की जांच चलती रही तो पता चला कि वह ऐसी कई शिकायत पहले भी दर्ज करा चुकी है। इसके बाद पता चला कि महिला होने का फायदा वह उठा रही है। इसके बाद उस पर केस किया और कोर्ट में चालान पेश किया। लोगों को मैसेज दिया कि महिला को जो अधिकार मिले है, वह इसलिए है कि समाज में वे सुरक्षित महसूस कर सके। इसके साथ कानून सभी के लिए एक है। जाे गलत है वह गलत है और वह सजा का हकदार है, हम किसी से भेदभाव नहीं करते। आप मिसेज इंडिया ग्लैम तक कैसे पहुंची, क्योंकि आप इससे पहले कभी भी कहीं पर भी रैंप पर नहीं चली है? मैं इस तरह की ऐसी किसी भी एक्टिविटी में हिस्सा नहीं रही। ये काम करना बहुत मुश्किल था। इसका भी एक काफी रोचक किस्सा है। एक बार ड्यूटी के दौरान मेरी मुलाकात इस पेजेंट के फाउंडर पवन टांक से हुई। मैं ड्यूटी के दौरान ही रोसाडो क्लब की चेकिंग के लिए पहुंची थीं। वहां की मैनेजर ने भी मुझे देखकर इस फील्ड में आने के लिए कहा। पवन जी ने भी बहुत प्रोत्साहित किया। तब मैंने उन्हें कहा था कि मुझे इसका बिल्कुल भी अनुभव नहीं है, मुझे इससे जुड़ा कुछ भी नहीं आता है। मैंने इसके लिए एक बार मना कर दिया था। जॉब और ब्यूटी प्रेजेंट के बीच कैसे टाइम बैलेंस किया और आगे इसे कैसे मैनेज करेंगे? मेरे सीनियर ऑफिसर्स ने मुझे सपोर्ट किया। जब मैंने उन्हें बताया कि मैं इस तरह के इवेंट का हिस्सा बनने जा रही हूं तो उन्होंने काम के साथ-साथ मुझे इससे जुड़ने के लिए भी सहमति प्रदान की। सभी ने कहा कि आप कुछ अचीव कर नाम रोशन कीजिए। इसके बाद मैं खुद पर तैयारी करना शुरू किया। रैंप वॉक से लेकर लोगों से बात करने के तरीके से लेकर मंच पर अपनी उपस्थिति को लेकर अलग तरीके से काम किया। इसके लिए हमारे एक्सपर्ट ब्रीफ करते थे और मैं उनके ट्रेनिंग सेंटर के अलावा घर पर भी उसकी प्रैक्टिस किया करती थी l कई महिलाएं और लड़कियां इस फिल्ड में आना चाहती हैं, कई कारणों से वह आ नहीं पाती ? मैं इन सभी महिलाओं को यही कहूंगी कि इस तरह के प्लेटफार्म पर उन्हें जरूर आना चाहिए। यहां से वह खुद को भी प्रूफ कर सकती हैं और एक समाज में अलग मैसेज भी दे सकती हैं। इसके लिए आपको एक जज्बे के साथ काम करना होगा। निश्चित ही जीत जरूर मिलेगी। कई बार महिलाएं शादी के बाद अपने सपनों को साइड कर देती हैं। पूरा टाइम फैमिली और बच्चों को ही देती हैं। मैं उन्हें यही कहूंगी कि अपने सपनों को नहीं छोड़ना चाहिए। अपने सपने को देखते हुए आगे बढ़ना चाहिए, उन्हें मंजिल जरूर मिलेगी। जब आप प्रेजेंट जीतकर अपने थाने पहुंची थी तो क्या माहौल आपको वहां मिला था? जब इस क्राउन के साथ में थाने पहुंची तो सभी ने मुझे बहुत अप्रिशिएट किया और बधाई दी। बड़े-बड़े अधिकारियों ने भी मुझे जीत के लिए शुभकामनाएं दीं। सभी ने यह भी कहा कि इस तरह के इवेंट में जीत हासिल करने से पुलिस में काम करने वाली महिलाएं भी प्रेरित होगी और आगे बढ़ाने के लिए अपना रास्ता चुनेगी। मेरी जीत के बाद एस एच ओ साहब और अन्य अधिकारियों ने मिलकर पूरे थाने में पार्टी दी। यह मेरे लिए हमेशा के लिए यादगार पर साबित हो गया। ये खबर भी पढ़ें… जयपुर की महिला SI ने जीता मिसेज इंडिया ग्लैम टाइटल:पहली बार रैंप पर उतरी थीं, ड्यूटी के साथ-साथ कैटवॉक की प्रैक्टिस की राजस्थान पुलिस की महिला सब इंस्पेक्टर ने ब्यूटी पेजेंट में मिसेज इंडिया ग्लैम-2025 का अवॉर्ड जीतकर सभी को चौंका दिया है। जयपुर में हुए इस कॉम्पिटिशन में देशभर से पार्टिसिपेंट शामिल हुए थे। (यहां पढ़ें पूरी खबर)


