शहरी सेवा शिविर-2025:1.73 लाख आवेदन पेंडेंसी में रखे, अफसर कह रहे- अब नहीं लगेंगे शहरी सेवा शिविर

सरकार ने लाखों परिवारों को पट्टे का सपना दिखाया। 312 शहर कस्बों में शहरी सेवा शिविर लगाए। अभियान चलाया। लेकिन अभियान बीच में बंद कर दिया। नतीजा यह रहा कि 1.73 लाख लोगों को पट्टे ही नहीं मिले। पहली बार है जब 1.73 लाख आवेदन पेंडेंसी में रखे हैं। इतने परिवारों ने लाखों रुपए फीस भरी और पट्टा आवेदन की फाइलें तैयार कर जेडीए, निगम, पालिकाओं में जमा कराई फिर भी पट्टे देने की बजाय आवेदन पेंडिंग छोड़ दिए। 309 शहरों में 16 से 23 प्रतिशत लोगों को ही पट्टे दिए। करीब 80 प्रतिशत को पट्टे ही नहीं मिले। अब स्वायत्त शासन विभाग और नगरीय विकास विभाग सहित हाउसिंग बोर्ड के अफसरों का कहना है कि पट्टों के लिए शहरी सेवा शिविर बंद हो चुके। अभियान वापस फिलहाल चलाने का प्लान नहीं है। ऐसे में सवाल है कि 1.73 लाख जनता कहां जाए? उनको पट्टे कैसे मिलेंगे। अब उनको निकाय कार्यालयों के अनगिनत चक्कर काटने के लिए छोड़ दिया है। 2.29 लाख आवेदन आएं
पिछली अशोक गहलोत सरकार के समय तत्कालीन यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने प्रशासन शहरों के संग अभियान चलाया था। उसमें 14 लाख से अधिक आवेदन आए थे। सरकार ने 11 लाख से अधिक को पट्टे दिए। लेकिन इस बार शहरी सेवा शिविरों में 2.29 लाख आवेदन आए। उनमें भी 1.73 लाख बकाया रख दिए। पट्टे नहीं दिए। पिछली सरकार की सफलता 75 प्रतिशत से अधिक रही। इस बार के शिविरों की सफलता 20 प्रतिशत ही रही। पट्टे के लिए सरकारों द्वारा अब तक चलाए चार अभियानों में सबसे कम पट्टे इस बार दिए गए। शहरी सेवा शिविर-2025 : फिसड्डी रहे फॉलोअप कैम्प शहरी सेवा शिविर-2025 के दिवाली से पहले बंद होने के बाद 3 नवंबर से फॉलोअप कैम्प लगाए जाने थे। कैंप औपचारिकता भर रहे। 5 दिन में पट्टे ही नहीं मिले। ऊपर से आदेश ही ऐसा था कि शिविर अवधि में दी छूट एवं शिथिलताओं के अनुरूप मांग पत्र जारी कर प्रकरणों को निस्तारित किया जाए, ताकि किसी भी पात्र आवेदक को असुविधा न हो। सूत्रों का कहना है कि शहरी सेवा शिविर अभियान फ्लाप रहा। इस कारण सरकार शहरी सेवा शिविर पार्ट-2 शुरू करने पर विचार कर रही है। लेकिन कब किया जाएगा, इसको लेकर मंत्री ने भी कुछ नहीं कहा। फिलहाल सरकार अपनी दूसरी वर्षगांठ मनाने की तैयारी में व्यस्त है।

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