शहर में खराब होती ट्रैफिक स्थितियों को सुधारने के लिए जो बजट घोषणाएं की गई थीं, वो एक के बाद एक निरस्त हो रही हैं। 2025-26 के बजट में 65 करोड़ से ‘झोटवाड़ा आरओबी से खातीपुरा तक एलिवेटेड रोड’ की जो घोषणा की गई, वह फिजिबिलिटी स्टडी में फेल हो गई है। कंसल्टेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा ट्रैफिक (485पीसीयू) के लिए एलिविटेड की जरूरत 2036 में होगी। फिलहाल, जोनल डेवलपमेंट प्लान में सड़क 100 फीट है, लेकिन मौके पर 60 से 70 फीट है। ऐसे में अतिक्रमण हटाकर सिर्फ चौड़ाई बढ़ा दें तो यही पर्याप्त है। रिपोर्ट के साथ जेडीए ने एलिवेटेड को ‘औचित्यपूर्ण नहीं’ जान रिपोर्ट यूडीएच को भेजी है। यही हाल सीकर रोड नंबर 1 पर ‘21 करोड़ के अंडरपास’ की घोषणा का भी है। जेडीए रिपोर्ट के मुताबिक इसकी भी जरूरत नहीं है। भास्कर पड़ताल में सामने आया कि साल 2025-26 की बजट घोषणाओं के साथ 2024-25 में हुई एलिवेटेड-फ्लाईओवर के 5 और प्रोजेक्ट भी फिजीबिलिटी रिपोर्ट में गैर-जरूरी आए हैं। इस संबंध में भी जेडीए ने सरकार को इन्हें निरस्त करने की सिफारिश भेज दी है। ये घोषणाएं करीब 1800 करोड़ रुपए की हैं। हाईटेक सिटी का भी यही हाल हाई टेक सिटी का भी यही हश्र, अहमदाबाद होकर आए, जमीनी पसंद की, अब प्रोजेक्ट ट्रांसफर: बड़े जोरों शोरों से जिस हाई टेक सिटी की घोषणा की गई थी, वो हवाई प्लान भी अब दम तोड़ते दिख रहा है। डेढ़ साल बाद यूडीएच को ख्याल आया है कि ये प्रोजेक्ट तो जेडीए के करने लायक है ही नहीं, क्योंकि यहां तो आईटी सेक्टर, फाइनेंशियल मैनेजमेंट, संस्था-कंपनियों को स्थापित कर वर्ल्ड क्लास सिटी के अनुरुप सुविधाएं विकसित करनी होगी। इस विचार के साथ प्रोजेक्ट को जेडीए से उद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दिया है। इससे पहले फरवरी में घोषणा के साथ जेडीए की टीम प्रोजेक्ट साकार करने के लिए अहमदाबाद प्रोजेक्ट की स्टडी करके आई थी। रिंग रोड, फागी आदि जगहों पर जमीनें तलाशी गईं, लेकिन यूडीएच मंत्री ने इससे भी खुद को अलग कर लिया। जेडीए ने फिजिबिलिटी रिपोर्ट यूडीएच को भेजी, कहा- ये प्रोजेक्ट गैरजरूरी हैं…मंत्री ने माना भी घोषणाओं को अमल में लाने के लिए स्टडी रिपोर्ट कराई गई थी। जैसे ही सच्चाई सामने आई, सरकार के ध्यान में लाया गया। यूडीएच में बैठक हुई, इसमें निर्णय लिया गया कि वास्तविक रिपोर्ट बनाकर भेजी जाए। इसके बाद ऐसा पहली बार है जबकि शहर के ट्रैफिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हुई इतनी ‘बजट घोषणाओं को सरेंडर’ किया गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या केवल नंबर गेम के लिए ताबड़तोड़ घोषणाएं की गईं? क्या ये जरूरी नहीं था कि पहले बेसिक स्टडी के बाद ही इन प्रोजेक्ट को घोषित किया जाता? स्थिति ये है कि जहां प्लान के मुताबिक सड़कों की चौड़ाई पूरी नहीं है, वहां भी एलिवेटेड-फ्लाईओवर की घोषणाएं कर दी गईं। ज्यादातर का यही हाल है। वहीं कुछ जगह केवल राजनीतिक कारणों से ये घोषणाएं हुईं। इसके बाद काम शुरू करने के लिए जब जमीनी हकीकत जानी गई तो ये गैर-जरूरी बताईं गईं। बड़े जोर-शोर से घोषित ये प्रोजेक्ट भी सरेंडर…. अम्बेडकर सर्किल से जवाहर सर्किल एलिवेटेड 7-9 किमी लंबा
1100 करोड़ लागत
कारण: मेट्रो का प्रोजेक्ट। इसलिए वही काम करे। कलेक्ट्रेट सर्किल से राजमहल पैलेस एलिवेटेड 3.5 किमी लंबा
400 करोड़ लागत
कारण: मेट्रो इसी रूट पर है, इसलिए संभव नहीं। फिजिबिलिटी रिपोर्ट में प्रोजेक्ट फेल पाए गए, उनको कैसे बढ़ाएं : खर्रा
“हाईटेक सिटी का काम नहीं करेंगे। उद्योग विभाग को ट्रांसफर कर दिया है। तकनीकी उनका काम है। एलिवेटेड के काम फिजिबलिटी रिपोर्ट में फेल हो गए, इसलिए कैसे कर सकते हैं। (क्या बजट घोषणा जल्दबाजी में हुई? सारे प्रोजेक्ट डेढ़ साल बाद ट्रांसफर और रद्द कर रहे?) अब फेल हो गए तो क्या करें।”
-झाबर सिंह खर्रा, यूडीएच मंत्री, राजस्थान सरकार 150 करोड़ के ये 2 फ्लाईओवर की रिपोर्ट- इनका कोई उपयोग ही नहीं 1 महिंद्रा सेज के पास 250 फीट एवं 200 फीट सड़क के इंटर सेक्शन पर प्रस्तावित फ्लाई ओवर। 2 पृथ्वीराज नगर दक्षिण क्षेत्र में वंदेमातरम सड़क पर पत्रकार कॉलोनी जंक्शन पर प्रस्तावित फ्लाई ओवर। कारण: वित्त विभाग को भेजी रिपोर्ट में जेडीए ने कहा है कि कंसलटेंट की फिजीबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार दोनों स्थानों पर ट्रैफिक और ट्रैफिक वृद्धि दर को देखते हुए ये फ्लाई ओवर निर्माण उपयोगी नहीं हैं। इसे निरस्त किया गया। 3 द्रव्यवती रीवर फ्रंट पर अंबाबाड़ी के आसपास पुलिया कारण: 5 करोड़ की ये घोषणा भी निरस्त कर दी गई है। जेडीए की ओर से इस संबंध में कहा गया कि मौके पर पुलिया तक कोई अप्रोच ही नहीं है। यानी पुलिया तक पहुंचने के लिए पहले दोनों ओर सड़क बनानी होगी।


