भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को प्रदेश कार्यकारिणी घोषित की। उसमें चार नाम बीकानेर से देकर कोटा पूरा किया मगर हैरानी की बात ये है कि बीकानेर के नेताओं की राजनीतिक शून्यता की वजह से दो ऐसे नाम भी बीकानेर के हवाले कर दिए गए जिनका यहां से कोई वास्ता नहीं है। सबसे चौंकाने वाला नाम दशरथ सिंह का है जो बीकानेर के प्रभारी तो रहे हैं जबकि वे झुंझुनूं के जिलाध्यक्ष रहे। लोकसभा का चुनाव वहां से लड़े हैं मगर उन्हें प्रदेश प्रवक्ता बनाकर बीकानेर का कोटा पूरा किया गया। भाजपा में आम कार्यकर्ता ये चर्चा करने लगे कि दशरथ सिंह बीकानेर के एक पदाधिकारी का कोटा खा गए। प्रदेश नेतृत्व ने भी नहीं सोचा कि उन्हें बीकानेर से दिखाया गया। दूसरी अपूर्वा सिंह हैं। अपूर्वा सिंह का भले ही बीकानेर में पीहर है। मगर वे रहती जयपुर में हैं। प्रदेश की ही राजनीति करती हैं फिर भी उनका नाम बीकानेर में डाल दिया गया। मूलत: बीकानेर जिले से सिर्फ दो ही नाम हैं। पहला नाम है बिहारी लाल बिश्नोई का जो नोखा से विधायक रहे हैं और एक जिलाध्यक्ष भी रहे हैं। अब वे प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए हैं। दूसरा नाम है आईटी सेल प्रभारी अविनाश जोशी का। वे बीकानेर शहर से हैं मगर प्रदेश नेतृत्व की सूची में बीकानेर से चार पदाधिकारी दिखाए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा 12 पदाधिकारी जयपुर शहर और ग्रामीण से हैं। चार पदाधिकारियों के साथ दूसरे नंबर पर बीकानेर है मगर हकीकत ये है कि बीकानेर से सिर्फ दो ही पदाधिकारी हैं। इसमें झुंझुुनूं और जयपुर के नेताओं को बीकानेर के खाते में डालकर कोटा चार का कर दिया गया। उपाध्यक्ष दूसरी बार आया, महामंत्री का इंतजार बीकानेर को बीते दो दशक में दूसरी बार प्रदेश उपाध्यक्ष पद मिला। बिहारी लाल बिश्नोई से पहले नंदू सोलंकी भी प्रदेश उपाध्यक्ष रहे हैं मगर भाजपा में उपाध्यक्ष की तुलना में महामंत्री प्रमुख पद माना जाता है। मंत्री के विरोधी गुट में होने पर भी प्रदेश टीम में स्थान बिहारी बिश्नोई प्रदेश उपाध्यक्ष बनाए गए। उसकी पहली वजह यह कि वे एक बार विधायक रहे। एक बार जिलाध्यक्ष भी रहे। संगठन का अनुभव भी है। हनुमानगढ़-श्रीगंगानगर के प्रभारी भी रहे। धीर-गंभीर भी है मगर बीकानेर से विधायक बनकर कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा और केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल खेमा उनको पसंद नहीं करता। वे विरोधी गुट में गिने जाते हैं। दो-दो मंत्रियों के विरोध में होने के बाद भी प्रदेश उपाध्यक्ष जैसा पद हासिल करना बिहारी के लिए मायने रखता है। अविनाश जोशी ज्यादातर राजनीति प्रदेश मुख्यालय में रहकर ही करते हैं। इसीलिए प्रदेश में उनके तमाम नेताओं से रिश्ते हैं। हालांकि वे बीकानेर पश्चिम विधानसभा से दावेदारी भी करते रहे हैं मगर आईटी सेल में उनका काम देखने के बाद वापस उन्हें वही रखा गया है।


