मल्टी-डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और एनआरसीसी की खोज:ऊंट के खून से एंटी स्नेक वेनम बनाने के लिए चूहों पर प्रयोग सफल, अब मानव पर क्लीनिकल ट्रायल होगा

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) और एनआरसीसी ने ऊंट के खून से एंटी स्नेक वेनम बनाने की दिशा में चूहों पर प्रयोग में सफलता पा ली है। अब मानव पर इसका क्लीनिकल ट्रायल करने की दिशा में काम चल रहा है।सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट और एनआरसीसी संयुक्त रूप से करीब 15 साल से ऊंट के खून से सांप के ज़हर के इलाज पर शोध कार्य कर रहे थे। कोरोना के कारण शोध कार्य तीन साल तक बंद रहा। वर्ष 2023 से यूनिट वापस सक्रिय हुई है। यूनिट के nodal अधिकारी डॉ. संजय कोचर ने बताया कि सांप का ज़हर ऊंट के शरीर में इंजेक्ट करने से उसमें एंटीबॉडी बनती है। फिर ऊंट का रक्त लेकर उससे एंटी स्नेक वेनम तैयार कर चूहों में इंजेक्ट करके देखा गया है। शोध के परिणाम उत्साहजनक मिले हैं। अब यह शोध मानव पर आज़माया जाएगा। इसके लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, ICMR, ड्रग विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों से संपर्क साधा गया है। एसपी मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉ. पी.डी. तंवर इस शोध पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। वर्तमान में एंटी स्नेक वेनम घोड़ों के खून से तैयार हो रहे हैं। सांप के काटे के इलाज की वैक्सीन 1895 में आई थी, जो घोड़ों के खून से तैयार हुई थी। सांप के काटे से हर साल 50 हजार मौतें इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च सर्वे और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्वे के अनुसार सांप के काटने से देश में हर साल 50 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा सांप के काटने से बचने वाले लोग भी शारीरिक रूप से अक्षम हो जाते हैं। ये मौतें ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में होती हैं, जहां किसान खेत में कृषि कार्य करते समय सर्पदंश के शिकार हो जाते हैं। “एसपी मेडिकल कॉलेज में मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट पिछले करीब 15 साल से काम कर रही है। इस अवधि में 65 तरह की बीमारियों पर रिसर्च कर चुके हैं। ऊंट के रक्त से एंटी स्नेक वेनम का मानव पर क्लीनिकल ट्रायल यदि सफल रहा तो सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम किया जा सकेगा।” -डॉ. संजय कोचर,सीनियर प्रोफेसर मेडिसिन एवं nodal अधिकारी, मल्टी डिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट भास्कर एक्सपर्ट “ऊंट के रक्त का वेनम अश्व से बनी दवा जितना ही प्रभावी होगा :इस अध्ययन में सांप सॉ-स्केल्ड वाइपर (Echis c. sochureki) के विष से प्रतिरक्षित ऊंटों की विशिष्टता और क्षमता का आकलन किया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक पूर्व-नैदानिक इन-विवो परीक्षणों का उपयोग करके घातक, रक्तस्रावी, स्कंदक और स्थानीय परिगलनकारी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार विष के निष्प्रभावन को मापा गया, क्योंकि ये इस प्रजाति के विष के सबसे महत्वपूर्ण लक्षण हैं।इन सभी प्रभावों के निष्प्रभावन में प्रति-विष-रोधी उल्लेखनीय रूप से प्रभावी पाया गया और इस प्रकार एक प्रतिरक्षाविज्ञानी परिप्रेक्ष्य सामने आया कि ऊंट IGG प्रति-विष (एकल-विशिष्ट) विशिष्ट अश्व प्रति-विषों जितना ही प्रभावी होगा या सांप-विशिष्ट विष के उपचार में उससे भी बेहतर विकल्प होगा।” — डॉ. पी.डी. तंवर, शोधकर्ता विशेषज्ञ

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