राजस्थान भाजपा से लेकर प्रदेश सरकार तक में जयपुर से संबंधित भाजपा नेताओं का दबदबा कायम है। सांगानेर विधायक भजनलाल शर्मा प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। विद्याधर नगर विधायक दीया कुमारी डिप्टी सीएम और दूदू विधायक डॉ. प्रेमचंद बैरवा भी डिप्टी सीएम हैं। अब भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की ओर से गुरुवार को घोषित की गई 34 पदाधिकारियों की नई कार्यकारिणी में भी जयपुर के भाजपा नेताओं का दबदबा दिखा। जयपुर के 13 नेताओं को विभिन्न पदों पर नियुक्ति दी गई है। प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ की टीम में 28 विधानसभा सीटों वाले उदयपुर संभाग से सिर्फ भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेशाध्यक्ष उदयपुर निवासी अल्का मुंदडा और बांसवाड़ा निवासी हकरू मईड़ा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा के गढ़ मेवाड़ में 28 में से 17 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है, फिर भी सिर्फ दो नेताओं को ही मौका मिला है। इससे भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मायूस हो गए हैं। भाजपा की नई प्रदेश कार्यकारिणी में उदयपुर संभाग से प्रमोद सामर, चन्द्रगुप्त सिंह चौहान, रवींद्र श्रीमाली, नरेंद्र मीणा, अनिता कटारा, सुशील कटारा के शामिल होने की संभावना जताई जा रही थी। राज्यसभा सांसद बनने की वजह से डॉ. चुन्नीलाल गरासिया को भी इस नई कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया गया है। प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ ने 480 दिन बाद बनी इस कार्यकारिणी में कुल 34 पदाधिकारी नियुक्त किए हैं। इनमें 9 उपाध्यक्ष, 4 महामंत्री, 7 मंत्री, 1 कोषाध्यक्ष, 1 सहकोषाध्यक्ष, 1 प्रकोष्ठ प्रभारी और 7 प्रवक्ता शामिल हैं। संभाग के 7 में से महज 2 जिलों को प्रतिनिधित्व प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ की नई कार्यकारिणी में उदयपुर संभाग के कुल 7 जिलों में से महज दो जिलों को ही प्रतिनिधित्व दिया गया है। चितौड़गढ, राजसमंद, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर जिले से किसी भी नेता को कार्यकारिणी में शामिल नहीं किया गया है। उदयपुर से उपाध्यक्ष बनीं अलका मुंदडा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला और प्रदेशाध्यक्ष रह चुके सतीश पूनिया की करीबी मानी जाती हैं। मुंदडा ने इसी साल शहर जिलाध्यक्ष और विधानसभा चुनावों में उदयपुर शहर से दावेदारी पेश की थी। जयपुर के इन 13 नेताओं को अहम पदों की जिम्मेदारी
प्रदेशाध्यक्ष राठौड़ की इस नई कार्यकारिणी में जयपुर के भाजपा नेता नारायण मीणा, अजीत मांडन व एकता अग्रवाल को मंत्री, सहकोषाध्यक्ष डॉ. श्याम अग्रवाल, प्रवक्ता कैलाश वर्मा, कुलदीप धनकड़, रामलाल शर्मा, मदन प्रजापत, राखी राठौड़, स्टेफी चौहान, कार्यालय सचिव मुकेश पारीक, सोशल मीडिया प्रभारी हीरेंद्र कौशिक, मीडिया प्रभारी प्रमोद कुमार वशिष्ठ को नियुक्त किया गया है। प्रवक्ता पद पर जयपुर के सियासी दबदबा के बीच बीकानेर के दशरथ सिंह ही प्रदेश के अन्य जिलों से इकलौते नेता हैं, जो कार्यकारिणी में जगह बनाने में सफल रहे हैं। ट्रेंड…साल 1998 से संभाग में जिसकी सीटें ज्यादा, सत्ता उसी की मेवाड़-वागड़ की राजनीति हर चुनाव में उतार-चढ़ाव दिखाती है। 1998 और 2008 में कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन 2003, 2013 और 2023 में भाजपा ने बड़ा प्रदर्शन कर सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाई। खासतौर पर 2013 में भाजपा ने 28 में से 25 सीटें जीतकर क्षेत्र में अभूतपूर्व वर्चस्व कायम किया। 2018 में मुकाबला अपेक्षाकृत संतुलित रहा, जहां कांग्रेस ने वापसी की कोशिश की, लेकिन 2023 में भाजपा ने फिर से बढ़त बना ली। आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र का वोट बैंक स्थिर नहीं है और सत्ता का गणित स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और जातीय समीकरणों के आधार पर लगातार बदलता रहता है। ऐसे में जो पार्टी मेवाड़-वागड़ में अपना सियासी वर्चस्व बनाए रखेगी उसे विधानसभा चुनाव में फायदा मिलना तय है।


