गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड अंतर्गत बिराजपुर में एक आंगनबाड़ी केंद्र पिछले लगभग 20 वर्षों से बदहाल स्थिति में संचालित हो रहा है। जर्जर भवन के अभाव में यह केंद्र कभी किराए के कच्चे मकान में, तो कभी पेड़ के नीचे कचरे के बीच चल रहा है। यहां नामांकित लगभग 30 बच्चों में से प्रतिदिन 25 बच्चे गंदगी के बीच बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। छत गिरने का खतरा बना रहता है केंद्र की सेविका पूजा कुमारी पांडेय ने बताया कि जिस कच्चे मकान में वर्षों से बच्चों को पढ़ाया जा रहा था, वह अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। उसकी छत गिरने का खतरा बना रहता है। इसी मजबूरी के कारण बच्चों को अब एक सीमित जगह वाले दूसरे स्थान पर पढ़ाया जा रहा है, जो कचरे से भरा हुआ है। सेविका पूजा कुमारी पांडेय और पंचायत के मुखिया किशुन राम ने विभाग से कई बार आंगनबाड़ी भवन के निर्माण की मांग की है। हालांकि, उनकी मांगों पर आज तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जिससे बच्चों को ऐसी दयनीय स्थिति में पढ़ना पड़ रहा है। प्रशासनिक उदासीनता का खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा: स्थानीय स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता का खामियाज़ा छोटे-छोटे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने एक बार फिर जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द आंगनबाड़ी भवन का निर्माण कराया जाए, ताकि बच्चे सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें। इस संबंध में बिरनी के वर्तमान सीओ संदीप मद्धेशिया ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की भवन स्थिति ठीक है, लेकिन यह सरकारी नहीं बल्कि किराए के मकान में संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के पेड़ के नीचे पढ़ने की स्थिति क्यों बनी हुई है, इसकी जांच की जाएगी।


