अजाक्स के प्रांताध्यक्ष और मध्य प्रदेश के कृषि विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी IAS संतोष वर्मा का मामला जल्द शांत होता नहीं दिख रहा है। अब रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने वर्मा के प्रमोशन पर सवाल उठाए हैं। सांसद ने केंद्रीय कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर जांच कराने की मांग भी की है। 28 नवंबर 2025 को लिखे पत्र में सांसद मिश्रा ने तीन बड़ी मांगें की हैं- कहा- चयन को अदालत ने गलत ठहराया था
सांसद ने चौंकाने वाला दावा किया है कि संतोष वर्मा का चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में जिन प्रक्रियाओं से हुआ, वे नियमों के विपरीत थीं। वर्मा को अनुसूचित जाति की जगह अनुसूचित जनजाति वर्ग में चयनित किया गया। उनके चयन और प्रमाणीकरण को वर्ष 2021 में अदालत ने भी गलत ठहराया था। न्यायालय के आदेश अनुसार वर्मा को पद और वेतन लाभ से वंचित किया जाना चाहिए था। मिश्रा ने पत्र में यह भी लिखा है कि वर्मा का नाम पूर्व में अदालत की अवमानना, अमर्यादित भाषा और सरकारी कार्य में बाधा जैसे मामलों में भी आया था। जिनके चलते उन्हें कारावास की सजा तक भुगतनी पड़ी थी। वर्मा के बयान को समानता के सिद्धांत का उल्लंघन बताया
सांसद मिश्रा ने पत्र में यह भी लिखा है कि IAS संतोष वर्मा का बयान न सिर्फ वर्ग विशेष के प्रति अपमानजनक है, बल्कि संविधान प्रदत्त समानता के सिद्धांत का उल्लंघन भी करता है। वर्मा ऐसे समय में विवादित और विभाजनकारी बयान दे रहे हैं, जब केंद्र सरकार जातीय कल्याण, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। इस तरह की टिप्पणी सरकार के सकारात्मक अभियानों को बदनाम करती है। सांसद ने इसे “संवेदनशीलता और प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ” बताया। डिप्टी सीएम शुक्ल बोले- इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने एक्स पर लिखा- एक आईएएस अधिकारी द्वारा बहन एवं बेटियों को लेकर की गई टिप्पणी अत्यंत आपत्तिजनक, असंवेदनशील और समाज में अनावश्यक विभाजन पैदा करने वाली है। किसी भी समाज के बहन और बेटियों के विरुद्ध ऐसी टिप्पणी विकृत मानसिकता का परिलक्षण है। एक उच्च पद पर बैठे अधिकारी के ऐसे विचार न केवल सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचाते हैं बल्कि प्रशासनिक गरिमा पर भी प्रश्न उठाते हैं।


