स्कूलों में उपलब्ध संसाधनों के उचित और सृजनात्मक उपयोग से आएगा शिक्षा में महत्वपूर्ण बदलाव : शर्मा

भास्कर न्यूज|गुमला जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थान, डायट, गुमला में “बच्चों के सीखने की दिशा में प्रभावी विद्यालयी प्रक्रियाएं विषय पर आधारित प्रधान शिक्षक सेमिनार का दो दिवसीय कार्यक्रम आज से विधिवत आरम्भ हुआ। इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन डायट प्राचार्य प्रियाश्री भगत एवं अन्य पैनलिस्ट द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया । डायट प्राचार्य ने कहा कि विद्यालयों में सीखने का वातावरण तभी प्रभावी बन सकता है, जब प्रधान शिक्षक नेतृत्व की भूमिका को गंभीरता से निभाएं और शैक्षणिक प्रक्रियाओं को निरंतर सक्रिय रखें। विद्यालयों के प्रधान शिक्षकों के लिए आयोजित यह दो दिवसीय सेमिनार विद्यालयी प्रक्रियाओं को मजबूत करने के पांच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित है। मुख्य आकर्षण शिक्षकों द्वारा प्रस्तुति सत्र रहा, जिसका नेतृत्व पैनलिस्ट गुरु प्रसाद शर्मा एवं सैय्यद मासूम ने किया। प्रतिभागियों ने अपने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारी प्रयासों जैसे विषय कोनों का पुनर्गठन, मासिक दीवार पत्रिका संचालन, पढ़ने की गतिविधियाँ और साप्ताहिक थीम आधारित प्रार्थना सभा को साझा किया। मुख्य अतिथि गुरु प्रसाद शर्मा ने कहा कि लीडर्स जन्मजात पैदा नहीं होते बल्कि बनाए जाते हैं। बदलाव की शुरुआत स्वयं के भीतर से होती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों के उचित और सृजनात्मक उपयोग से छोटे-छोटे नवाचार भी बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। पैनलिस्ट सैय्यद मासूम ने कहा कि बेहतर परिणाम के लिए शिक्षकों को रीडिंग कार्नर की किताबें स्वयं भी पढ़नी चाहिए, तभी बच्चे प्रेरित होते हैं। विद्यालय का सहयोगी वातावरण सीखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों को पठन संस्कृति विकसित करने और विद्यालय को सीखने का केंद्र बनाने के लिए प्रेरित किया। सेमिनार के दौरान प्रतिभागियों में भागीदारी, पारस्परिक सीखने और सराहना की संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल के साथ कहा गया कि जब शिक्षक एक-दूसरे से सीखते हैं और सकारात्मक कार्यों की सराहना होती है, तो विद्यालय में टीम भावना मजबूत होती है, जिसका सीधा असर बच्चों के सीखने पर पड़ता है। डायट प्राचार्य प्रियाश्री भगत ने कहा कि उनके विचार न केवल प्रेरणादायी हैं बल्कि विद्यालय स्तर पर परिवर्तन लाने के लिए अत्यंत व्यावहारिक भी हैं। उन्होंने सभी प्रधानाध्यापकों को दोनों दिन पूरे प्रशिक्षण में पूर्ण गंभीरता और सक्रियता के साथ भाग लेने का निर्देश दिया और कहा कि इस प्रशिक्षण का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब इसे विद्यालयों में लागू किया जाए। डायट संकाय सदस्य डाक्टर रंजना सिंह एवं सिकंदरनाथ प्रजापति के मंच संचालन एवं समन्वय में आयोजित इस सेमिनार में जिले के सभी प्रखंडों से लगभग 150 शिक्षक और प्रधानाध्यापक शामिल हुए। बड़ी संख्या में सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि जिले में शिक्षण-अधिगम सुधार के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ रही है।

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