MP के 12 शहरों में पारा 10° से नीचे:भोपाल, इंदौर-उज्जैन में कोहरा; एक्सपर्ट की सलाह-सुबह ध्यान से चलाएं गाड़ी

मध्यप्रदेश में ठंड ने फिर यू टर्न ले लिया है। गुरुवार-शुक्रवार की रात जबलपुर, ग्वालियर समेत प्रदेश के 12 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया। वहीं, इंदौर, भोपाल-उज्जैन समेत कई जिलों में सुबह कोहरा छा रहा है। ऐसे में एक्सपर्ट ने सलाह दी है कि कोहरे के बीच सुबह गाड़ी ध्यान से चलाएं। ताकि, हादसे की संभावना न रहे। मौसम विभाग के अनुसार, पाकिस्तान के ऊपर से पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) एक्टिव है, जबकि राजस्थान में साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) की एक्टिविटी देखने को मिल रही है। दूसरी ओर, उत्तर से भी हवाएं आ रही हैं। इस वजह से प्रदेश के मौसम में एक बार फिर ठंडक घुल गई है। दूसरी ओर, कोहरा भी छा रहा है। भोपाल में रात से ही धुंध का असर शुरू हो जाता है। वहीं, सुबह के समय विजिबिलिटी 1 से डेढ़ हजार मीटर तक रहती है। शनिवार को भी कोहरे का असर बना रहेगा। एक सप्ताह बाद पारे में फिर गिरावट
पिछले एक सप्ताह से प्रदेश में दिन-रात के तापमान में बढ़ोतरी देखने को मिल रही थी, लेकिन गुरुवार-शुक्रवार की रात में पारा फिर से लुढ़कने लगा है। एक ही रात में 4 से 5 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 6.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। छतरपुर के नौगांव में 6.5 डिग्री, रीवा में 6.8 डिग्री, उमरिया में 6.9 डिग्री, खजुराहो में 7.8 डिग्री, मलाजखंड में 8.6 डिग्री, दतिया में 9 डिग्री, मंडला में 9.3 डिग्री और राजगढ़ में पारा 9.6 डिग्री रहा। बड़े शहरों में जबलपुर में पारा सबसे कम 9.4 डिग्री रहा। भोपाल में एक ही रात में चार डिग्री की गिरावट के बाद तापमान 11 डिग्री दर्ज किया गया। इंदौर में 15.1 डिग्री, ग्वालियर में 9.7 डिग्री और उज्जैन में 15.5 डिग्री सेल्सियस रहा। बाकी शहरों में पारा 10 डिग्री से ज्यादा रहा। 6 से 22 नवंबर तक कड़ाके की ठंड रही
बता दें कि प्रदेश में 6 नवंबर से ही कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो गया था। आम तौर पर नवंबर के दूसरे पखवाड़े से तेज ठंड पड़ती है, लेकिन इस बार पहाड़ी राज्य- हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में समय से पहले बर्फबारी हो गई। इस वजह से बर्फीली हवाओं से एमपी भी कांप उठा। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली। रिकॉर्ड के अनुसार, साल 1931 के बाद शीतलहर का यह सबसे ज्यादा दिन है। दूसरी ओर, यहां रात का पारा 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो ओवरऑल रिकॉर्ड भी रहा। इंदौर में नवंबर की सर्दी का 25 साल का रिकॉर्ड टूट गया। 22 नवंबर तक तेज ठंड का असर रहा, लेकिन इसके बाद शीतलहर से राहत मिली। ऐसा हवा का दिशा से बदलना रहा। इस वजह से उत्तर से ठंडी हवा एमपी में नहीं आई और शीतलहर से राहत मिल गई, लेकिन अब फिर से कड़ाके की ठंड और शीतलहर का दौर शुरू हो जाएगा। मौसम विभाग ने अगले 2 दिन तक ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान जताया है। दिसंबर के पहले सप्ताह से फिर से कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो जाएगा। सुबह कोहरा…इसलिए गाड़ी संभलकर चलाने की सलाह
प्रदेश में ठंड का असर भले ही कम हुआ हो, लेकिन सुबह व रात में कोहरा दा रहा है। इसलिए एक्सपर्ट ने लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग करने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने हेल्थ और फसलों को लेकर एडवाइजरी भी जारी की है। एमपी में ठंड से अब तक दो की मौत
कड़ाके की ठंड की वजह से पिछले दो दिन में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। रीवा के अमहिया थाना क्षेत्र स्थित अस्पताल चौराहा पर सड़क किनारे एक व्यक्ति की लाश पड़ी मिली थी। इससे पहले रायसेन में भी एक शख्स की मौत हो चुकी है। परिजनों का दावा है कि ठंड की वजह से ही मौत हुई, लेकिन प्रशासन ने ठंड से मौत होने की पुष्टि नहीं की है। जानिए, नवंबर में 5 बड़े शहरों का मौसम… भोपाल: इस बार टूट गया ओवरऑल रिकॉर्ड
नवंबर में भोपाल में रात का तापमान 9 से 12 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। पिछले 10 साल से ऐसा ही ट्रेंड रहा है। इस बार पहले सप्ताह से ही तेज ठंड का असर रहा। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल में नवंबर में रात का तापमान 6.1 डिग्री तक पहुंच चुका है। यह 30 नवंबर 1941 को दर्ज किया गया था, लेकिन इस साल 16 नवंबर की रात में पारा 5.2 डिग्री रहा। इस तरह नवंबर की सर्दी का ओवरऑल रिकॉर्ड बन गया है। यहां इस महीने बारिश होने का ट्रेंड भी है। 10 साल में तीन बार बारिश हो चुकी है। साल 1936 में महीने में साढ़े 5 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है। इंदौर: 5.6 डिग्री तक जा चुका न्यूनतम पारा
इंदौर में नवंबर में ठंड का असर रहता है। खासकर दूसरे सप्ताह से पारा तेजी से गिरता है। इस वजह से रातें ठंडी हो जाती हैं और टेम्प्रेचर 10 से 12 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। 25 नवंबर 1938 को पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। इंदौर में कभी-कभार बारिश भी हो जाती है। दिन में 31 से 33 डिग्री के बीच तापमान रहता है। ग्वालियर: 1927 में 3 इंच पानी गिरा था
पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो नवंबर में ग्वालियर में पारा 8 डिग्री तक पहुंच चुका है। 54 साल पहले वर्ष 1970 में टेम्प्रेचर 3 डिग्री गया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। 2 नवंबर 2001 को दिन का तापमान 37.3 डिग्री तक रहा, जबकि यह सामान्य तौर पर 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। ग्वालियर में इस महीने बारिश भी होती है। 1927 में पूरे महीने 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में 3 बार ऐसा ही मौसम रह चुका है। जबलपुर: 1946 में 6 इंच से ज्यादा बारिश
जबलपुर में पिछले 10 साल में 2022 में न्यूनतम पारा 7.8 डिग्री सेल्सियस तक जा चुका है। ओवरऑल रिकॉर्ड 12 नवंबर 1989 को दर्ज किया गया था, तब टेम्प्रेचर 3.9 डिग्री तक पहुंच गया था। 1946 में पूरे महीने 6 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। 10 साल में दो बार बारिश हो चुकी है। दिन में 30 से 33 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान रहता है। उज्जैन: न्यूनतम तापमान 10-11° के बीच
उज्जैन में 30 नवंबर 1974 को रात का तापमान 2.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 6 नवंबर 2008 को दिन का तापमान 36.5 डिग्री रहा था। पिछले 10 साल की बात करें तो न्यूनतम तापमान 10-11 डिग्री के बीच रहा है, जबकि दिन में यह 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *