सीएम आयुष्मान बाल-संबल योजना अब बड़े मरीजों पर भी लागू:मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मरीजों के हक में हाईकोर्ट का आदेश, दुर्लभ रोगियों को आयु सीमा से मिली राहत

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी दुर्लभ बीमारी से पीड़ित मरीजों के उपचार को लेकर आदेश दिया है। इसमें अंतरिम आदेश पारित करते हुए मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना-2024 की उम्र सीमा हटा दी है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस अनुरूप सिंघी की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अगला आदेश आने तक योजना की अनुच्छेद 5 की कंडीशन-1 सभी आयु वर्ग के लोगों पर लागू मानी जाएगी। सिर्फ 18 साल से कम उम्र के मरीजों तक सीमित नहीं रहेगी।​ स्वावलंबन फाउंडेशन की ओर से इस मुद्दे को लेकर याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता संस्था की तरफ से सीनियर एडवोकेट डॉ. सचिन आचार्य ने दलीलें रखीं। ​ डॉ. आचार्य के साथ सहयोगी अधिवक्ता चयन बोथरा व सार्थक आसोपा ने भी याचिकाकर्ता संस्था की तरफ से पक्ष रखा। डॉ. आचार्य ने कोर्ट के सामने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मरीजों की पहचान, जांच, उपचार, नीतिगत खालीपन और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी से जुड़े पांच प्रमुख बिंदु रखे। पांच बिंदुओं में बताई समस्याएं मस्कुलर डिस्ट्रॉफी मरीजों की दिक्कतें: जीन टेस्टिंग सुविधा नहीं
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि राजस्थान में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और अन्य कई रेयर डिजीज के लिए बेसिक डायग्नोसिस भी मुश्किल है, क्योंकि AIIMS जोधपुर स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में जीन टेस्टिंग नहीं हो रही। मरीजों को महंगे निजी लैब्स पर निर्भर रहना पड़ता है। निजी लैब पर निर्भरता के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। इससे इलाज और अधिक लेट हो जाता है, जबकि बीमारी प्रोग्रेसिव होने के कारण हर महीने स्थिति बिगड़ती जाती है।​ उपचार के स्तर पर कोर्ट को बताया गया कि पूरे राजस्थान में फिलहाल केवल AIIMS जोधपुर एक फंक्शनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है। जहां दूर-दराज के मरीजों के लिए पहुंचना भी अपने आप में चुनौती है। जेके लोन हॉस्पिटल को रेयर डिजीज के लिए नोडल बनाकर रखा गया है, लेकिन व्यावहारिक रूप से वहां इलाज की बजाय विभागीय/प्रशासनिक काम ही हो रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल स्कीम के तहत केवल 63 सूचीबद्ध रेयर डिजीज का इलाज कवर है, जबकि GNE मायोपैथी, Becker MD, Limb Girdle MD जैसी बीमारियां सूची से बाहर हैं।​ मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ गंभीर होती
एडवोकेट डॉ. आचार्य ने कोर्ट को बताया कि योजना अभी सिर्फ 18 साल से कम उम्र के मरीजों तक सीमित है, जबकि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ और गंभीर होती हैं। वयस्क मरीज पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित हो जाते हैं। उनकी दलील थी कि वयस्क मरीजों के लिए न तो मुफ्त इलाज, न ही पुनर्वास और डे-केयर सेंटर की कोई ठोस व्यवस्था है, जबकि ऐसे मरीजों को 24 घंटे देखभाल, फिजियोथेरेपी और सपोर्टिव ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिले स्तर पर डे-केयर सेंटर बनाए जाएं, जिनकी निगरानी जिला कलेक्टर को नोडल अधिकारी के रूप में सौंपी जाए। साथ ही केरल, तमिलनाडु, हरियाणा जैसे राज्यों की तरह वित्तीय सहायता व सपोर्टिव ट्रीटमेंट की व्यवस्था हो।​ सरकार ने भी माना बीमारी गंभीर व प्रोग्रेसिव भी
राज्य सरकार की तरफ से एडिशनल एडवोकेट जनरल ने स्वीकार किया कि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक प्रोग्रेसिव और गंभीर बीमारी है, जो प्राइमरी तौर पर युवाओं को प्रभावित करती है। उनका कहना था कि विशेषज्ञों की राय के अनुसार 18 साल की उम्र के बाद मरीजों की सर्वाइवल संभावना न्यून हो जाती है। इसी कारण मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना-2024 को फिलहाल 18 वर्ष तक के बच्चों तक सीमित रखा गया है। हालांकि कोर्ट के समक्ष दाखिल अतिरिक्त हलफनामा और एक विस्तृत ‘एक्शन प्लान’ का जिक्र भी हुआ, जिसे बेंच ने अगली तारीख पर विस्तार से देखने की बात कही।​ हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश: फिलहाल सभी उम्र के मरीजों को लाभ
बेंच ने रिकॉर्ड और दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट कहा कि अदालत इस मुद्दे को लेकर “बेहद चिंतित और व्याकुल हैं”। कोर्ट ने फिलहाल मेरिट पर विस्तृत टिप्पणी टालते हुए एक अहम अंतरिम राहत देते हुए निर्देश दिया कि- अगला आदेश आने तक मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना 2024 की क्लॉज 5 की कंडीशन-1 को इस तरह पढ़ा जाए कि वह सिर्फ 18 वर्ष से कम नहीं, बल्कि सभी आयु वर्ग के लोगों/मरीजों पर लागू होगी। यानी, अब जब तक आगे कोई संशोधित आदेश नहीं आता, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और अन्य सूचीबद्ध दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित वयस्क मरीज भी उसी तरह की आर्थिक व उपचार सहायता पाने के हकदार होंगे। जैसी अभी तक केवल नाबालिगों को मिल रही थी।​ राज्य सरकार को शेष मुद्दों पर जवाब के लिए दिया समय
कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा पेश एक्शन प्लान और याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए अन्य बिंदुओं पर विस्तृत सुनवाई के लिए समय दिया। शेष मुद्दों पर निर्देश लेने के लिए AAG की मांग पर कोर्ट ने समय मंजूर किया। इसलिए मामले को अगली सुनवाई के लिए 16 दिसंबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *