कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से नहीं कराए जाने को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेव, जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में कहा गया कि कॉलेजों में एडमिशन लेते वक्त हर मद में फीस ली जाती है। कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट भी छात्रसंघ चुनाव कराए जाने को लेकर स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है। छात्रसंघ चुनाव नहीं होंगे तो देश-प्रदेश को नई लीडरशिप कैसे मिलेगी? चुनाव होंगे तो छात्र अपना लीडरशिप कौशल दिखा पाएंगे। डिविजन बेंच ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि चुनाव को लेकर प्रिंसिपल बेंच में पहले से याचिका विचाराधीन है। उस याचिका में सरकार को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। सरकार से पूछा है कि वह चुनाव कराने के लिए क्या प्रयास कर रही है? याचिकाकर्ता अवि सूर्यवंशी की ओर से अधिवक्ता आकाश शर्मा ने यह जनहित याचिका दायर की है। इंदौर में 15 साल से सीधे छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए हैं। कॉलेज के छात्रों को सीधे-सीधे वोट देने का अवसर ही नहीं मिला है। क्लास प्रतिनिधि सीधे चुन लिए जाते हैं। वह मिलकर कॉलेज अध्यक्ष तय कर लेते हैं, जबकि छात्रसंघ चुनाव का तरीका यह है कि अलग-अलग पैनल से प्रत्याशी खड़े होते हैं। वह अपने तरीके से छात्रों के बीच प्रचार करते हैं। छात्र अपनी पसंद से वोट देते हैं। सरकार ने विवाद के डर से छात्रसंघ चुनाव ही बंद करवा दिए थे। मप्र में सीएम सहित 8 मंत्री ऐसे जो छात्र राजनीति से आए मप्र सरकार में 8 मंत्री ऐसे हैं जिन्होंने छात्र राजनीति से करियर शुरू किया। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट शामिल हैं।


