भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की अनदेखी वाहन चालकों की जिंदगी के लिए खतरा बन रही है। हाईवे के किनारे झाड़ियों को समय पर न हटाने और रखरखाव की कमियों की वजह से दुर्घटनाओं और मौतों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। सिवनी-प्रिंट्याड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे समय तक वाहन चालकों को गड्ढों से गुजरना पड़ा। हालांकि, अब गड्ढों की संख्या में कमी आई है, लेकिन सड़क के किनारे फैली झाड़ियां अभी भी बड़ा खतरा बनी हुई हैं। अंधे मोड़ों पर बढ़ा दुर्घटनाओं का खतरा दो-लेन हाईवे पर चलने वाले विशेष रूप से बाइक चालकों को इन झाड़ियों के कारण परेशानी हो रही है। सड़क किनारे उगी झाड़ियों ने साइड सोल्डर (पटरी) को पूरी तरह से ढक लिया है। सड़क किनारे झाड़ियों के कारण अंधे मोड़ों पर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। झाड़ियों की अधिकता के कारण सुरक्षा रेलिंग और संकेतक बोर्ड भी नजर नहीं आते। झाड़ियां हटाने के लिए लिखा गया पत्र 22 नवंबर को बम्होडी के पास एक क्षतिग्रस्त नहर पुलिया पर हुई दुर्घटना में तीन लोगों की मौत के बाद यातायात विभाग ने एनएचएआई प्रोजेक्ट डायरेक्टर को झाड़ियां हटाने और दोनों किनारों पर एक-एक मीटर साइड सोल्डर तैयार करने के लिए पत्र लिखा था। लेकिन डेढ़ महीने बाद भी इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। रखरखाव में लापरवाही स्पष्ट जिले के राकेश नागफसे, अमित श्रीवास्तव, हेमंत पंचेश्वर, संजू साहू, शोहेल खान, और रविशंकर दुबे सहित अन्य लोगों का कहना है कि सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह हाईवे की तकनीकी खामियां और रखरखाव की अनदेखी है। एनएचएआई के अधिकारियों की लापरवाही के कारण सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। पेट्रोलिंग के बावजूद रखरखाव कार्य नहीं हाईवे की सुरक्षा के लिए एनएचएआई द्वारा अधिकृत कंपनी 24 घंटे पेट्रोलिंग वाहन दौड़ाती है। इसके बावजूद सड़क की कमियों को दूर करने और रखरखाव कार्य में लापरवाही की जा रही है। इस साल सड़क दुर्घटनाओं में 315 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 107 मौतें नेशनल हाईवे पर हुईं। यातायात नियमों का पालन अनिवार्य यातायात थाना प्रभारी विजय बघेल का कहना है कि हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे नियमों का पालन करने से दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समितियों की बैठकों में भी सड़कों को सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जाता है।


