रायपुर में एनआईटी चौपाटी शिफ्टिंग को लेकर विरोध और तेज हो गया है। आज कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता काले कपड़े पहनकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन देने निकले, लेकिन पुलिस ने उन्हें गांधी मैदान कांग्रेस कार्यालय के बाहर ही रोक दिया।पूर्व विधायक विकास उपाध्याय के नेतृत्व में निकल रहे इस विरोध मार्च को रोकने के दौरान पुलिस और कांग्रेसियों के बीच झूमाझटकी भी हुई। कुछ देर तक हंगामे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा हुई, जिसके बाद कांग्रेसी वापस लौट गए। NIT चौपाटी को लेकर कांग्रेस का लगातार विरोध एनआईटी चौपाटी हटाए जाने और उसे आमानाका शिफ्ट किए जाने के फैसले पर कांग्रेस लगातार आपत्ति जता रही है। कुछ दिन पहले विवाद तब बढ़ गया था, जब युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने विधायक राजेश मूणत के पोस्टर पर कालिख पोत दी थी।पोस्टर विवाद में पुलिस ने युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज की, जिसके बाद यूथ कांग्रेस और NSUI ने सरस्वती नगर थाना का घेराव किया। उन्होंने मांग रखी कि: कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि 7 दिनों में कार्रवाई नहीं होने पर वे मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। कैसे बढ़ा विवाद? 26 नवंबर को बीजेपी द्वारा नालंदा परिसर की घोषणा का होर्डिंग लगाया गया था, जिसमें विधायक राजेश मूणत की फोटो लगी थी। इसी के विरोध में कार्यकर्ताओं ने पोस्टर पर कालिख पोती थी। इससे पहले चौपाटी से दुकानों को आमानाका शिफ्ट किया जा चुका है, लेकिन कांग्रेस इसे एकतरफा और मनमाना फैसला बता रही है। नालंदा-2 निर्माण योजना से बढ़ी राजनीति रायपुर की इस चौपाटी पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च कर विकास किया गया था। सरकार बदलने के बाद भाजपा सरकार ने यहां नालंदा-2 बनाने का निर्णय लिया और नवंबर 2025 में इसका टेंडर भी पूरा हो गया। रायपुर में चौपाटी हटाने का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि पूरा राजनीतिक विवाद बन चुका है, जिसका असर लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है।


