पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की ताजा रिपोर्ट ने साल 2005 के बाद सेवा में आए मध्य प्रदेश के 4 लाख 59 हजार से अधिक कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। मुंबई से आई इस खबर में बताया गया है कि नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) की इक्विटी योजना का रिटर्न सिर्फ 4 माह में 40 से घटकर 16% रह गया है। इसे शेयर बाजार में गिरावट का नतीजा बताया जा रहा है। ऐसे में कर्मचारियों को ओल्ड पेंशन स्कीम में ही भविष्य सुरक्षित दिखाई दे रहा है। मुंबई से आई इस खबर को शेयर करते हुए नेंशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं ने प्रदेश के कर्मचारियों से ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू कराने में सहयोग करने की अपील की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष परमानंद डेहरिया, भोपाल जिला अध्यक्ष सुरसरि प्रसाद पटेल ने एनपीएस के दायरे में आ रहे कर्मचारियों से एकजुट होकर ओल्ड पेंशन की लड़ाई लड़ने को कहा है। उन्होंने कहा कि ये मौन रहने का समय नहीं है। अपने अधिकार के लिए अब भी खड़े नहीं हुए, तो भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। बुढ़ापे में पछताएंगे कि उस दिन पुरानी पेंशन की लड़ाई में साथ दिया होता, तो आज गांठ में कुछ पैसे होते। डेहरिया और पटेल ने बताया कि भारत सरकार एनपीएस के लिए कर्मचारियों के वेतन से 10% राशि काट रही है। 14% खुद मिलाकर शेयर बाजार में लगा रही है। शेयर बाजार कभी स्थिर नहीं रहता है। इसलिए यह कहना बिलकुल भी सही नहीं है कि रिटायर होने पर कर्मचारी को अच्छी पेंशन मिल पाएगी। जैसे अभी इक्विटी 40% से गिरकर 16% पर पहुंच गई है, ऐसा ही रिटायरमेंट के समय या बाद में हुआ तो जो जमा किया होगा, वह भी नहीं मिल पाएगा। संगठन के नेताओं ने कर्मचारियों को आगाह किया है कि इक्विटी का धड़ाम से गिरना इस ओर इशारा है कि भविष्य सुरक्षित नहीं है। इसलिए ओल्ड पेंशन की लड़ाई में शामिल हो जाएं।


