2 साल पहले सड़क दुर्घटना में एक 6 साल के बच्चे की मौत में मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल, भोपाल (MACT) ने उसके परिवार को 19.80 लाख रुपए की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बच्चे को स्किल्ड वर्कर माना और उसकी आमदनी 11885 रुपए प्रति माह मानकर उसमें भविष्य की आमदनी में काउंट की। कोर्ट ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया कि वह उसके परिवार को 19.80 लाख रुपए की राशि का भुगतान करें। खास बात यह कि बच्चे की सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में MACT में इतनी बड़ी क्लेम राशि देने का यह प्रदेश में पहला मामला है। यह मामला बाल श्रम का भी नहीं है। तेज रफ्तार कार ने मारी टक्कर, बच्चे की मौत
मामला रायसेन के खंडेल गांव का है। यहां दमोह निवासी वारेलाल-माया रानी गोंड दंपती अपने तीन बच्चों आसिम (12), महेश (8) और हरिराम (6) के साथ मजदूरी करने आए थे। 22 अगस्त 2023 को हरिराम अपने माता-पिता के साथ खाना खाने सड़क किनारे से जा रहे थे। तभी भोपाल-सागर रोड पर तेज रफ्तार से आ रही कार ने हरिराम को जोरदार टक्कर मारी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे रायसेन के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत गई। मामले में उसके परिवार ने 28 अगस्त 2023 को MACT में कार मालिक हेमंत कुलकर्णी (सफायर बायोटेक प्रा.लि, भोपाल), ड्राइवर सपना पति रमाकांत पटेल (भोपाल) और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड (भोपाल) से 11.73 लाख रुपए की क्लेम राशि दिलाने की मांग की थी। कोर्ट ने माना यह आधार
कोर्ट ने न्याय दृष्टांत नगजी भाई जजमेंट को आधार माना। इसमें ऐसे बच्चे जो 1 वर्ष से 15 वर्ष तक के उम्र के होते हैं, उन्हें स्किल्ड वर्कर की संज्ञा दी गई है। कोर्ट ने हरिराम की कम से कम आमदनी 11881 रुपए प्रति माह मानी। इसमें 40 प्रतिशत उसकी भविष्य आमदनी (Future Prospect) और जोड़ी। इस तरह उसकी आमदनी करीब 17 हजार रुपए प्रति माह मानी गई। साथ ही कुल गुणांक के साथ इंश्योरेंस कंपनी को आदेश दिया है कि वह हरिराम के परिवार को 19.80 लाख रुपए अदा करें। खास बात यह कि मध्य प्रदेश में बच्चों की इस तरह की मौत में MCAT द्वारा पारित आदेशों में अब अधिकतम 5 से 7 लाख रुपए तक ही क्लेम मिला है। लेकिन यह प्रदेश का पहला ऐसा फैसला है, जिसमें 6 साल के बच्चे की मौत में इतनी ज्यादा राशि का अवॉर्ड पारित किया गया है। बाल श्रम नहीं बल्कि भविष्य का स्किल्ड वर्कर था बच्चा
एडवोकेट अरुण त्रिपाठी ने बताया कि यह बाल श्रम का मामला नहीं है। दरअसल, तीन प्रकार की कैटेगरी होती है। कुशल, अकुशल और अर्द्ध कुशल। हरिराम 6 वर्ष का होकर पूरी तरह स्वस्थ था। वह बालिग होने के बाद बिना पढ़ाई-लिखाई के कोई भी छोटे-मोटे टेक्निकल काम से लेकर इंजीनियरिंग कर सकता था। इस वजह से कोर्ट ने उसे स्किल्ड वर्कर माना। उसकी भविष्य की आय कम से कम 11885 रुपए प्रति माह होती लेकिन उसकी कम उम्र में ही मौत हो गई। उसकी भविष्य की 40 प्रतिशत आय भी इसी अनुपात (कम से कम) में मानी गई। मैंने तो अधिकतम 11.73 लाख रुपए की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने नागजी भाई जजमेंट को आधार माना और इससे भी ज्यादा कुल 11.80 लाख रुपए देने का आदेश दिया। यह बच्चों की मौत के मामले में MACT द्वारा पास किया गया प्रदेश में सबसे ज्यादा राशि क्लेम केस है।


