चंडीगढ़ पीजी मेडिकल कोटा में बड़ा बदलाव:10वीं-12वीं का नियम खारिज, HC ने कहा-स्कूली शिक्षा के आधार पर सीटें नहीं भर सकती सरकार

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी चंडीगढ़ पीजी मेडिकल कोटा के लिए लागू 10वीं -12वीं की शर्त को खारिज कर दिया है। एमडी/एमएस प्रवेश से जुड़े प्रॉस्पेक्ट्स के क्लॉज-बी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने साफ कहा कि यूटी प्रशासन पीजी सीटें भरने के लिए कोई स्वीकार्य और वैध मानदंड कोर्ट के सामने रखने में विफल रहा है। इस मामले में डॉ. तन्वी ने याचिका लगाई थी जिसपर अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को होगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि 50% अखिल भारतीय कोटे की सीटों के बाद बची 50% संस्थागत सीटें केवल इंस्टीट्यूशनल प्रेफरेंस (संस्थागत वरीयता) के आधार पर ही भरी जाएंगी, क्योंकि यूटी चंडीगढ़ पूल सीटों को भरने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाई जा रही स्कूली शिक्षा आधारित पॉलिसी कानूनन सही नहीं है। स्कूल-आधारित मानदंड अस्वीकार्य हाईकोर्ट ने कहा कि 10वीं या 10वीं+12वीं कक्षा चंडीगढ़ से पास करने के आधार पर पीजी मेडिकल सीटें भरने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह मानदंड योग्यता से समझौता करता है, जबकि स्नातकोत्तर मेडिकल सीटों के लिए योग्यता ही सर्वोपरि है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह पॉलिसी राष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है। NEET-PG काउंसलिंग भी देशभर में इसी सिद्धांत पर की जाती है, जिसमें योग्यता को प्राथमिकता दी जाती है। यूटी मेडिकल कोटा की पहले की नीतियां भी हो चुकी हैं खारिज पहले भी कई बार यूटी मेडिकल कोटा से जुड़ी नीतियां अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी हैं। निवास आधारित मानदंड, 5 साल की स्कूली शिक्षा और 5 साल की संपत्ति के मालिकाना जैसे नियमों को भी अदालत ने पहले अस्वीकार्य बताया था। कोर्ट ने कहा कि प्रशासन द्वारा पेश की गई वर्तमान शर्त भी इन्हीं खारिज किए जा चुके प्रयासों जैसी है, जिसे मान्यता नहीं दी जा सकती। तीनों को कोर्ट पहले ही बता चुके अवैध कोर्ट ने कहा कि वर्तमान शर्त भी पहले किए गए उन सभी अस्वीकार्य प्रयासों जैसी है जिन्हें पहले भी खारिज किया जा चुका है, इसलिए इसे मंजूरी नहीं दी जा सकती। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह पिछली न्यायिक टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए, कानून के अनुरूप और योग्यता आधारित नई नीति तैयार करे। प्रशासन को अगली सुनवाई तक नई पॉलिसी बनाने की पूरी छूट दी गई है। नई पॉलिसी तैयार करे और अगली सुनवाई से पहले अपना हलफनामा दाखिल करे। याचिका पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी यह मामला डॉ. तन्वी द्वारा उठाया गया था, जिन्होंने चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया है। उन्होंने यूटी पूल सीटें भरने के नियमों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा प्रस्ताव प्रथम दृष्टया स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक नई और वैध नीति तैयार नहीं होती, तब तक सीटों का आवंटन ऐसी प्रक्रिया से किया जाए जो कानून के अनुरूप हो और जिसमें योग्यता से कोई समझौता न किया जाए।

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