CBI ने घूसखोरों की डिलीट मोबाइल चैट्स की रिकवर:करवाया जाएगा क्रॉस वेरिफिकेशन, लेन-देन का मिला पुराना हिसाब

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) घूसकांड मामले में रविवार को 5वें दिन भी जांच जारी है। CBI की ओर से घूसकांड में शामिल लोगों की तलाश की जा रही है। रिमांड पर चल रहे आरोपियों से CBI टीम पूछताछ कर अहम जानकारी जुटा रही है। CBI सूत्रों के मुताबिक, ITAT घूसकांड में अरेस्ट किए आरोपी डॉ. एस सीता लक्ष्मी, एडवोकेट राजेंद्र सिंह सिसोदिया और अकाउंटेंट-मेंबर कमलेश राठौड़ को आमने-सामने बैठाकर दोबारा पूछताछ की जाएगी। CBI की ओर से आरोपियों के जब्त किए डिजिटल डिवाइस व मोबाइल की जांच की जा रही है। जिसमें ITAT की ओर से दिए गए निर्णयों के ड्राफ्ट भी बताए जा रहे है। जिन्हें बाद में अंतिम आदेश पारित करने के समय बदल दिया जाता था। रिमांड खारिज का किया आग्रह
CBI के पब्लिक प्रोसिक्यूटर राहुल अग्रवाल ने कोर्ट को बताया- इस मामले से जुड़े कई लोग अभी-भी भूमिगत है। जांच में मिले डॉक्यूमेंट का एनालिसिस करने के अलावा इससे जुड़े हुए कुछ रिकॉर्ड जुटाए जाने है। वहीं, दूसरी ओर डॉ. एस. सीता लक्ष्मी की ओर से सीनियर एडवोकेट एस.एस होरा ने CBI की ओर से की गई उनकी अरेस्टिंग को गलत बताया। कहा- इस मामले में कई नियमों की अनदेखी हुई है, सुप्रीम कोर्ट व राजस्थान हाईकोर्ट के कई निर्णयों का उल्लेख करते हुए CBI के अतिरिक्त रिमांड के आवेदन को खारिज करने का आग्रह भी किया। 2 का रिमांड, 1 को जेसी
आरोपी एडवोकेट राजेन्द्र सिसोदिया के वकील हिमांशु अग्निहोत्री ने पकड़ी गई डायरी में उल्लेखित नामों की जांच और हवाला से किए गए लेन-देन को आधार बना कर मांगी गई सीबीआई कस्टडी का विरोध किया। कहा- इस मामले में आरोपी बनाए गए सहायक पंजीयक के.सी. मीना और आईटीएटी के अकाउंट मेंबर गगन गोयल के खिलाफ सीबीआई की चुप्पी रहस्यमय है। आरोपी मुज्जमिल के एडवोकेट समर शर्मा ने कोर्ट को बताया- इस मामले में पक्षकार खुद पीड़ित है, अत: इस मामले में उसे गलत फंसाया गया है। स्पेशल कोर्ट के जज प्रविन्द्र पाल सिंह ने मौजूद तथ्यों और दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद ITAT जयपुर बेंच की न्यायिक सदस्य डॉ. एस. सीता लक्ष्मी और एडवोकेट राजेन्द्र सिंह सिसोदिया को 2 दिसंबर तक CBI रिमांड और पक्षकार मुज्जमिल को 12 दिसंबर तक जेसी भेजने के आदेश दिए। कई अहम सबूत मिले
CBI सूत्रों के मुताबिक, जांच में घूसखोरी मामले में रिश्वत में ली रकम को ठिकाने लगाने के संबंध में कई अहम सबूत CBI को मिले है। न्यायिक सदस्य डॉ. एस सीता लक्ष्मी के सर्च में कीमती साडियां व गहने मिले है। जिसका पेमेंट कैश के साथ ही दूसरे लोगों के नाम का बिल होना सामने आया है। ऐश-आराम से जुड़ी चीजों की खरीद भी दूसरे व्यक्ति ने की है। आरोपी एडवोकेट राजेन्द्र सिंह सिसोदिया के सर्च में मिली डायरी में ITAT अफसरों से किए लेन-देन का पुराना हिसाब मिला है। घूसकांड में पकड़े गए आरोपियों के डिलीट किए मोबाइल चैट्स को CBI ने रिकवर करवाया है, जिसमें कई अहम सबूत हाथ लगे है। CBI की लिस्ट में शामिल लोगों को पकड़ जल्द ही पूरे मामले का क्रॉस वेरिफिकेशन करवाया जाएगा।

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