नवीन संत भवन का भूमिपूजन:आचार्य विशद सागर बोले; श्रमण परंपरा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी संपदा

जैन नगर लालघाटी स्थित श्री शांतिनाथ जिनालय के समीप बनने वाले पंचमुखी नवीन संत भवन का भूमिपूजन श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। आचार्य विशद सागर महाराज एवं उनके संघ के 10 साधुओं के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से अनुष्ठान किए गए। भगवान शांतिनाथ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने शिलाएं अर्पित कर इस पुण्य कार्य में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। अनुष्ठान का निर्देशन पंडित राजेश राज द्वारा किया गया, जबकि संचालन सुनील पब्लिशर ने संभाला। मंदिर समिति अध्यक्ष निर्मल जैन टीआई एवं संरक्षक अजय ज्योतिष ने बताया कि आचार्य संघ के सानिध्य में भगवान शांतिनाथ का अभिषेक और जगत शांति की कामना के साथ शांति धारा की गई। पूजा-अर्चना के बाद शिलान्यास की क्रियाएं सम्पन्न हुईं। मंदिर समिति के प्रवक्ता सौरभ इंजीनियर ने जानकारी दी कि श्री शांतिनाथ जिनालय में आने वाले समय में भव्य स्वर्णमयी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। शिलान्यास पुनर्चक परिवार के नलिन जैन द्वारा किया गया। इस दौरान आशीर्वचन में आचार्य विशद सागर महाराज ने कहा कि “भारतीय संस्कृति में श्रमण परंपरा हमारी सबसे बड़ी संपदा है। हजारों वर्षों से संतों का तप, त्याग और संयम इस पावन भूमि की आधारशिला रहा है। संतों का मार्गदर्शन ही सुख, समृद्धि और शांति का कारण है। जीवन में धर्म आराधना के साथ परोपकार को भी स्थान देना चाहिए। कार्यक्रम में पंचायत कमेटी अध्यक्ष मनोज बांगा, पूर्व अध्यक्ष प्रमोद हिमांशु, विनोद रेडीमेड, मनोज बबलू, सुरेश शिखर टावर, सुनील पब्लिशर, अभिषेक जैन एडवोकेट, अजीत बर्फी, शैलेश स्टील, मनीष दिगंबर, सपन सर्राफ, मुकेश नूतन, संदीप टाइल्स, मुकेश गोहिल सहित बड़ी संख्या में जैन समाजजन मौजूद रहे।

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