रौली और सवाई माधोपुर जिलों की सीमा पर प्रस्तावित पीकेसी लिंक परियोजना के डूंगरी बांध को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को करौली कलेक्ट्रेट के सूचना केंद्र सभागार में प्रभावित गांवों के किसानों और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें ग्रामीणों ने अपनी आपत्तियां स्पष्ट शब्दों में रखीं। किसानों की मांग – डूंगरी बांध तुरंत निरस्त किया जाए बैठक में उपस्थित ग्रामीणों ने कहा कि बांध बनने से बड़ी संख्या में किसान प्रभावित होंगे, जिनकी आजीविका पूरी तरह खेती पर आधारित है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि परियोजना जरूरी है तो उसका निर्माण चंबल क्षेत्र में किया जाए, जहां इसका उद्घाटन किया गया था। आजीविका पर संकट: 21 सदस्यीय समिति ने दिखाई नाराजगी बैठक में 21 सदस्यीय कमेटी के मुखिया हेमराज दिवाकर ने कहा कि डूंगरी बांध बनने पर कई गांवों की कृषि भूमि डूब क्षेत्र में चली जाएगी, जिससे ग्रामीणों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए 21 या 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को समय देने की मांग की, ताकि किसान अपनी बात सीधे सरकार के सामने रख सकें। ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन करौली जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना को सौंपा और जनभावनाओं को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। कलेक्टर का बयान – अभी कोई सर्वे नहीं, 16 गांव प्रभावित होने का अनुमान जिला कलेक्टर नीलाभ सक्सेना ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि फिलहाल बांध से जुड़े किसी सर्वे का कार्य नहीं चल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना से लगभग 16 गांव प्रभावित होने का अनुमान है। कलेक्टर ने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की भावनाओं और आपत्तियों को सरकार तक पहुंचाया जाएगा और प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का प्रयास किया जाएगा। बैठक में मौजूद अधिकारी और ग्रामीण बैठक में डीएसपी अनुज शुभम, सपोटरा थाना अधिकारी अबजीत कुमार, तहसीलदार दीपक कुमार, मुकेश भूप्रेमी (सवाई माधोपुर), प्रोफेसर हेमराज दिवाकर, तेजराम पटेल (बुकना), हंसराज सिंगरपुरा, जगदीश पटेल, भरत मीना (जोडली) और रूप सिंह मीणा सहित अन्य किसान मौजूद थे।


