बीकानेर के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में रविवार को सुबह से शाम तक धमाकों की आवाजें सुनाई दी। भारत और इंग्लैंड के जवानों ने यहां न सिर्फ नई तकनीक से बने हथियारों का उपयोग किया बल्कि युद्ध क्षमता को बढ़ाने के लिए ड्रोन सहित कई नए उपकरणों से रणनीतिक समझ को बढ़ाने का काम किया। अंतिम दिन आयोजित संयुक्त प्रदर्शन में सैनिकों ने आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव डेमोंस्ट्रेशन दी, जिसमें ड्रोन संचालन, शहरी युद्धक तकनीकें, रैपिड इंटरवेंशन और उन्नत हथियार प्रणालियों का उपयोग शामिल था। रेंज के फॉरेन ट्रेनिंग नोड में भारत और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘अजेय वॉरियर–25’ का आठवाँ संस्करण आज औपचारिक रूप से सम्पन्न हो गया। 17 से 30 नवंबर 2025 तक चले इस 14-दिवसीय अभ्यास ने रेगिस्तानी धरातल पर दोनों देशों की सेनाओं की युद्धक क्षमता, रणनीतिक समझ और सामरिक समन्वय को नए आयाम दिए। इस अभ्यास में कुल 240 सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिनमें भारत और ब्रिटेन दोनों का समान प्रतिनिधित्व रहा। भारत से सिख रेजीमेंट और इंग्लैंड से रॉयल गोरखा राइफल्स अभ्यास में भारतीय सेना की सिख रेजीमेंट तथा ब्रिटिश आर्मी की 4th लाइट ब्रिगेड, First Division के अंतर्गत आने वाली द्वितीय बटालियन, रॉयल गोरखा राइफल्स (2 RGR) ने संयुक्त रूप से भागीदारी की। भारतीय दल का नेतृत्व कर्नल नीरज बेनीवाल ने किया, जबकि ब्रिटिश दल की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल साइमन डाइसन के हाथों में रही। ब्रिटेन से 120 सैनिकों का विशेष दल महाजन पहुंचा, जिसे रेगिस्तान की कठोर परिस्थितियों में भारतीय सेना की विशेषज्ञ इकाइयों के साथ अभ्यास करने का अवसर मिला। शहरी आतंकवाद पर फोकस
इस संयुक्त अभ्यास का मूल केंद्र शहरी क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी अभियानों को उन्नत बनाना और संयुक्त ऑपरेशनों की दक्षता बढ़ाना रहा। अगले दो सप्ताह में दोनों सेनाओं ने ब्रिगेड स्तर पर मिशन की संयुक्त योजना बनाना, सिमुलेशन आधारित सामरिक अभ्यासों से गुजरना और वास्तविक आतंकवाद-रोधी परिदृश्यों के आधार पर कंपनी स्तर की फील्ड ट्रेनिंग को अंजाम देना शामिल था। इनकी हुई ट्रेनिंग इस दौरान सैनिकों ने हाइब्रिड युद्ध, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस, रैपिड डिप्लॉयमेंट और इंटीग्रेटेड युद्धक रणनीतियों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्राप्त किया। ऐसे चला अभ्यास महाजन फील्ड फायरिंग रेंज की तपती रेत ने भारतीय सेना को अपने रेगिस्तानी कौशल और काउंटर-टेरर स्पेश्यिलिटी प्रदर्शित करने का अवसर दिया। वहीं ब्रिटिश सेना की लाइट इन्फैंट्री यूनिट्स ने तेज प्रतिक्रिया, गतिशीलता और कठिन परिस्थितियों में संचालन की अपनी पहचान को और मजबूत किया। दोनों देशों की सेनाओं ने Combined Integrated Battle Teams (CIBT) के रूप में मिशन की हर प्रक्रिया को साझा किया—योजना, समन्वय, अभ्यास और अंतिम कार्रवाई तक। इससे इंटरऑपरेबिलिटी के नए मानक स्थापित किए। ड्रोन और रोबोटिक सपोर्ट से काम इस वर्ष का अभ्यास विशेष रूप से इसलिए भी उल्लेखनीय रहा क्योंकि इसमें आत्मनिर्भर भारत की सैन्य तकनीकों ने विशेष आकर्षण बटोरा। DRDO के MULE सिस्टम, रोबोटिक सपोर्ट प्लेटफॉर्म्स तथा Ashni Drone Platoon ने अभ्यास के दौरान अपनी उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल पीटर हुल्डन हार्ट (सीओ, 2 रॉयल गुरखा राइफल्स) और लेफ्टिनेंट कर्नल साइमन डाइसन (मिलिट्री एडवाइज़र, ब्रिटिश हाई कमीशन) ने एक दूसरे देश को अपनी नई तकनीक की जानकरी दी। किसने क्या कहा? इसे सैनिकों के लिए सीख, अनुभव और सामरिक सहयोग का अनूठा अवसर बताया। -कर्नल नीरज बेनीवाल, भारतीय दल के कमांडर दोनों देशों के जवानों ने कठिन परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त कर एक नया उदाहरण प्रस्तुत किया है, और ब्रिटेन वर्ष 2027 में इसकी अगली कड़ी आयोजित करने के लिए तैयार है। -लेफ्टिनेंट कर्नल साइमन डाइसन, ब्रिटिश दल के प्रमुख


