शिवपुरी में धीरेंद्र शास्त्री की कथा का समापन:बोले- अब बाबर की छाती पर रघुवर का झंडा हर हाल में लहराता रहेगा

शिवपुरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के समापन दिवस पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन की सराहना की। उन्होंने बताया कि समारोह में ड्राइवर के बेटे और मुख्यमंत्री के बेटे को एक साथ दूल्हे के रूप में खड़ा कर समाज में समानता का संदेश दिया गया। शास्त्री के अनुसार, यह विचार उनकी वृंदावन में धर्म यात्रा के दौरान हुई बातचीत में आया था, जब सीएम ने कहा था कि समाज में सच्ची समानता तभी दिखेगी जब सभी वर्गों के लोग एक मंच पर सम्मान के साथ खड़े हों, और शनिवार को इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिला। शिवपुरी की आस्था और अनुशासन की सराहना
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा स्थल पर उमड़ी भीड़ और अनुशासन की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शिवपुरी की भक्ति को देखकर लगता है कि “अब बाबर की छाती पर रघुवर का झंडा हर हाल में लहराता रहेगा।” उन्होंने शिवपुरी में रामकथा करने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि यहां मिला सम्मान वे जीवनभर नहीं भूल पाएंगे। बागेश्वरधाम में 15 फरवरी को सामूहिक विवाह
शास्त्रीजी ने बागेश्वरधाम में 15 फरवरी को होने वाले 300 कन्याओं के सामूहिक विवाह सम्मेलन में शिवपुरी के हर भक्त को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह नहीं, बल्कि समाज सेवा और सनातन धर्म के उत्थान का महाकुंभ होगा। दिव्य दरबार- भक्तों की समस्याएं सुनीं दोपहर 3 बजे से हुए दिव्य दरबार में शास्त्रीजी ने श्रद्धालुओं की समस्याएं सुनीं। एक युवक अपनी शादी न होने की चिंता लेकर पहुंचा। एक युवती प्रेम विवाह का समाधान जानने आई। दोनों की बातें सुनकर शास्त्रीजी ने हंसते हुए कहा “न मेरी शादी हुई है, न मेरे गुरुजी की हुई है, लेकिन लोग विवाह की समस्या लेकर सबसे ज्यादा आते हैं।” इसके बावजूद उन्होंने दोनों को समाधान और आशीर्वाद दिया। “शक्तियां समाज सेवा के लिए मिली हैं”
दिव्य दरबार के दौरान उन्होंने कहा कि यदि संतों के मंच पर कोई अन्य मजहब का व्यक्ति आए तो चाहें तो उसे कड़ी फटकार लगाई जा सकती है, लेकिन वे ऐसा नहीं करते क्योंकि धर्म से मिली शक्तियां लोगों के कल्याण और पीड़ा दूर करने के लिए होती हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शरीर में प्राण हैं, वे धर्म और समाज सेवा में लगे रहेंगे। ‘काले हनुमान’ की पहली बार झलक
इस अवसर पर उन्होंने अपने झोले से एक छोटी हनुमान प्रतिमा निकालकर लोगों को दर्शन कराए, जिसे उन्होंने ‘काले हनुमान’ कहा। उन्होंने बताया कि यह मूर्ति हमेशा उनके साथ रहती है, पर पहली बार भक्तों को दिखा रहे हैं। प्रतिमा देखते ही पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। भावुक विदाई- पंडाल जयकारों से गूंज उठा
सात दिवसीय कथा के समापन पर हुआ विदाई समारोह अत्यंत भावुक था। शास्त्रीजी के मंच से उतरते ही महिलाएं, बुजुर्ग और युवा नम आंखों से खड़े रहे। कई भक्त चरण स्पर्श करने झुक पड़े। मार्ग पर फूल बरसाए गए। बच्चों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाए। मुख्य यजमान ऊषा-रामप्रकाश गुप्ता व शिल्पी-कपिल गुप्ता ने चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। भीड़ इतनी अधिक थी कि शास्त्रीजी को वाहन तक पहुंचने में समय लग गया। हजारों भक्त उनके वाहन के आगे-पीछे चलते रहे और हाथ हिलाकर विदाई देते रहे। जब वाहन मैदान से बाहर निकला, तब भी श्रद्धालु लंबे समय तक सड़क किनारे खड़े होकर उनके दर्शन करते रहे। देखिए तस्वीरें…

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