भास्कर न्यूज | जांजगीर जिले में हर साल एचआईवी संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग आज भी एड्स जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जांजगीर-चांपा जिले में वर्ष 2011 से अब तक, यानी पिछले 15 वर्षों में डेढ़ लाख रक्त नमूनों की एचआईवी जांच की गई, जिनमें 736 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए। इनमें सर्वाधिक संख्या पुरुषों की है। लापरवाही और जागरूकता के अभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष केवल 10 महीनों में 38 नए एचआईवी संक्रमित मरीज मिले हैं। इनमें 25 पुरुष, 10 महिलाएं और 7 गर्भवती महिलाएं शामिल हैं। गर्भवती महिलाओं का संक्रमित मिलना मदर-टू-चाइल्ड ट्रांसमिशन के बढ़ते जोखिम का संकेत है। स्वास्थ्य विभाग लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है, लेकिन इसके बावजूद एड्स मरीजों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं हो रही है। जांच रिपोर्ट में पुरुष, महिलाएं व थर्ड जेंडर-सभी श्रेणियों के मरीज मिले हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई दंपति एचआईवी पॉजिटिव होने के बावजूद फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं, जिससे बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। वर्ष संक्रमित मिले 2011-2012 6 2012-2013 64 2013-2014 53 2014-2015 32 2015-2016 44 2016-2017 47 2017-2018 41 2018-2019 53 2019-2020 66 2020-2021 47 2021-2022 65 2022-2023 32 2023-2024 79 2024-2025 69 2025 अक्टूबर 38 ^जिला अस्पताल परामर्श केंद्र के काउंसलर विद्याभूषण महंत बताते हैं, लोगों में यौन संबंधों को लेकर जागरूकता की कमी है। कई दंपती एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद भी फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं, जिससे बच्चे संक्रमित हो रहे हैं। जिला अस्पताल में एचआईवी जांच पूरी तरह निशुल्क और गोपनीय होती है। समय पर इलाज से संक्रमण की जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। एचआईवी का पूर्ण इलाज नहीं है। पुरुषों की संख्या अधिक एड्स जैसी घातक और अभी तक लाइलाज बीमारी को लेकर लोग पर्याप्त गंभीर नहीं हैं। पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों में कुल 736 संक्रमित मरीजों में पुरुष 499, जबकि महिलाएं 237 हैं। पुरुषों में संक्रमण दर सबसे अधिक दर्ज की गई है। एचआईवी के ये हैं लक्षण { गले में लगातार सूजन { बिना कारण वजन घटना { बार-बार बीमार होना और ठीक न होना { मुंह में घाव { त्वचा में खुजली या दर्द { प्रतिरोधक क्षमता का गिरना ऐसे फैलता है संक्रमण { संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध { संक्रमित सिरिंज व सुई का साझा उपयोग { संक्रमित रक्त चढ़ाने से { पीड़ित गर्भवती से शिशु में


