अमरकंटक के संत रामदास का महाराष्ट्र में निधन:पंचधारा में 35 वर्ष तपस्या की, 5000 भाषाओं का ज्ञान था

अमरकंटक के पंचधारा में पिछले 35 वर्षों से तपस्या कर रहे संत रामदास का रविवार रात को निधन हो गया है। उन्हें लगभग 5000 भाषाओं का ज्ञान होने का दावा किया जाता है, जिसे उन्होंने एक पुस्तक में भी लिपिबद्ध किया गया है। उनके निधन से उनके शिष्यों और भक्तों में शोक का माहौल है। संत रामदास को 5000 भाषाओं का ज्ञान होने की बात कही जाती थी। उन्होंने इस ज्ञान को अपनी एक पुस्तक में संकलित भी किया था। अमरकंटक को प्राचीन काल से ही संत-महात्माओं की तपोस्थली के रूप में जाना जाता रहा है, और संत रामदास भी इसी परंपरा का हिस्सा थे। पुष्पराजगढ़ के पूर्व विधायक सुदामा सिंह ने संत रामदास के निधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महाराज के कई शिष्य और भक्त जिले के भीतर और बाहर से उनसे जुड़े हुए थे। स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्हें महाराष्ट्र के बुलडाना स्थित चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था, जहां उनका स्वर्गवास हो गया। संत रामदास का अंतिम संस्कार उनकी जन्मस्थली लावा घुघरी, पांढुरना, छिंदवाड़ा में किया जाएगा।

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