इंदौर के डबलचौकी वन क्षेत्र में शनिवार शाम तीन वर्षीय तेंदुए के बर्बर शिकार का मामला सामने आया। गांव गढ़ी के पास सड़क किनारे एक गड्ढे में पड़े तेंदुए के शव के पोस्टमॉर्टम में पुष्टि हुई कि उसे अंगों के लिए मारा गया और बाद में फेंक दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार तेंदुए के आगे के दोनों पंजे काटे गए थे, नाखून निकाले गए थे और ऊपरी नुकीले दांत किसी मशीन या धारदार हथियार से काटे गए थे। घटनास्थल के पास ही क्लच वायर का फंदा मिला, जिसका एक हिस्सा तेंदुए के शरीर पर भी लिपटा हुआ था। पोस्टमॉर्टम में स्पष्ट हुआ कि तेंदुए की मौत फंदा कसने से हुए अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई। डॉग स्क्वाड फॉर्म हाउस तक पहुंचा था रविवार सुबह स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) और डॉग स्क्वाड ने करीब 3 किलोमीटर क्षेत्र में सर्च किया। डॉग स्क्वाड एक नजदीकी फॉर्म हाउस तक जाकर रुका, जिसके बाद टीम ने आसपास के क्षेत्र की जांच और तेज कर दी। ग्रामीणों ने भी टीम को कुछ संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी दी है। पोस्टमॉर्टम में हुई बर्बरता की पुष्टि पशु चिकित्सक डॉ. विवेक शर्मा और डॉ. चतुर्भुज नागर की टीम ने पोस्टमॉर्टम में पाया कि, वन विभाग ने प्रोटोकॉल के तहत कराया अंतिम संस्कार शव शनिवार देर शाम मिलने के बाद वन अमले ने रातभर स्थल की सुरक्षा की। रविवार सुबह इंदौर रेंज, STSF और डॉग स्क्वाड की टीम मौके पर पहुंची। पोस्टमॉर्टम के बाद वन अधिकारियों ने तेंदुए का अंतिम संस्कार वन्यजीव संरक्षण प्रोटोकॉल के तहत किया। शव की लोकेशन संदिग्ध
तेंदुए के शरीर पर संघर्ष के निशान मौजूद थे, लेकिन जिस स्थान पर शव मिला वहां न खून मिला, न संघर्ष के निशान और न ही घसीटे जाने के प्रमाण। वन विभाग का मानना है कि तेंदुए को किसी दूसरी जगह मारा गया और शव को सड़क किनारे लाकर फेंका गया। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार शव की हालत देख यह आशंका मजबूत होती है कि शिकार अंगों की तस्करी के लिए किया गया। वन-राजस्व सीमा पर शव मिलने से बढ़ी आशंकाएं जहां शव मिला, वह स्थान वन और राजस्व भूमि की सीमा पर है। अधिकारी मानते हैं कि ऐसे क्षेत्रों का उपयोग शिकारी अक्सर निगरानी से बचने के लिए करते हैं। संदेह है कि जानबूझकर यहां शव फेंककर जांच को भ्रमित करने की कोशिश की गई है। विभाग की टीमें तेंदुए को मारने के स्थान, शिकारियों के नेटवर्क और इस अवैध गतिविधि में शामिल लोगों की तलाश में जुटी हुई हैं।


