सलूंबर टोडा सांसद आदर्श ग्राम पंचायत टोडा के राजस्व ग्राम सालैया में बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। गांव की 172 बीघा उपजाऊ जमीन पिछले चार साल से पानी में डूबे हैं, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। ग्रामवासियों ने सोमवार 01 दिसंबर को तीसरी बार सामूहिक रूप से प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर समस्या के शीघ्र समाधान की मांग की। इससे पहले 31 अक्टूबर 2025 और 17 नवंबर 2025 को भी ज्ञापन दिए गए थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने बताया, सालैया का ऐतिहासिक तालाब लगभग 150 वर्ष पूर्व बामनिया, धारोद, गुड़, रूआव और सालैया गांवों की सिंचाई के लिए बनाया गया था। नहर प्रणाली शुरू होने के बाद तालाब का पानी अब उपयोग में नहीं आ रहा है। इसके कारण तालाब ओवरफ्लो होकर खेतों में घुस रहा है, जिससे कृषि भूमि लगातार डूब रही है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले से ही 172 बीघा खेतीहर भूमि पानी में डूबी हुई थी। हाल की बारिश से अतिरिक्त 100 बीघा भूमि और पानी में डूब गई है, जिससे फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। इस स्थिति के कारण कई किसान बेरोजगार हो गए हैं और कुछ परिवार पलायन को मजबूर हैं। चार वर्ष पूर्व उपखंड अधिकारी सलूंबर ने बामनिया की पाल के पास एक निकास पॉइंट निर्धारित किया था। वर्षों तक इसी मार्ग से अतिरिक्त पानी निकलता रहा, जिससे सालैया की कृषि भूमि सुरक्षित रहती थी। हालांकि, वर्तमान में यह निकास मार्ग पूरी तरह बंद हो चुका है, जिसके कारण खेतों में भरे पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि निकास पॉइंट की समय-समय पर सफाई नहीं की गई और तालाब का प्रबंधन भी शून्य है। गांव में सड़कों की हालत भी जर्जर है, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। सालैया में स्ट्रीट लाइट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण रात्रि में आवाजाही मुश्किल हो जाता है और गांव अंधेरे में डूबा रहता है। तीसरे ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि तालाब के निकास पॉइंट को तुरंत चालू किया जाए और डूबी हुई कृषि भूमि से पानी हटाया जाए। इसके अलावा, उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत, गांव में स्ट्रीट लाइटें लगाने और सरकार द्वारा दिए जाने वाले मछली पालन अनुदान का पारदर्शी लाभ सुनिश्चित करने की भी मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।


