जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के ‘जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा’ वाले बयान को लेकर विरोध तेज हो गया है। मध्य प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल ने स्थानीय पुलिस थानों में एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए शिकायतें सौंपी हैं। संगठनों का कहना है कि यह बयान देश की एकता और हिंदू समाज के खिलाफ उकसाने वाला है। संगठनों द्वारा दिए गए आवेदन में कहा गया है कि मदनी का भाषण भड़काऊ, विभाजनकारी और राष्ट्र-विरोधी था। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि मदनी ने अपने भाषण में बहुसंख्यक समाज पर अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश की है। धारा 152, 196 और 353 के तहत कार्रवाई की मांग वंदे मातरम पर बयान से आपत्ति शिकायत में आरोप है कि मदनी ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और राष्ट्रीय प्रतीकों को बदनाम करने का प्रयास किया। शिकायतकर्ताओं ने इसे राष्ट्रीय गौरव को आहत करने वाला बयान बताया है। शिकायत में कहा गया है कि मदनी ने अपने भाषण में भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था पर पक्षपात का आरोप लगाया और राम मंदिर, ट्रिपल तलाक व अन्य मामलों के फैसलों पर आपत्ति जताई। संगठनों का आरोप है कि यह न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता कमजोर करने की कोशिश है। एफआईआर आवेदन के अनुसार मदनी ने अपने संबोधन के दौरान कहा—“जहां-जहां जुल्म होगा, वहां-वहां जिहाद होगा।” संगठनों ने इसे हिंसा और विद्रोह के लिए सीधा उकसावा बताया है। बता दें कि मौलाना मेहमूद मदनी ने यह बयान 29 नवंबर को भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी बैठक में दिया था। अगले दिन से ही रोशनपुरा सहित कई जगह विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। मौलाना मदनी भोपाल में बोले- मुर्दा कौमें सरेंडर करती हैं भोपाल में मौलाना महमूद मदनी ने कहा, मुसलमानों को लगातार टारगेट किया जा रहा है और उनके धार्मिक पहनावे, पहचान और जीवनशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान इस देश के बराबर के नागरिक हैं, लेकिन शिक्षा, रोजगार और सामाजिक बराबरी के अधिकार जमीनी स्तर पर कमजोर हो रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…


