कई बरसों के बाद इस साल के जनवरी में वेस्टर्न डिस्टरबेंस काफी कमजोर चल रहा है। इसके चलते गुरु नगरी में धुंध और शीतलहर का असर दिख रहा है। साथ ही रात और दिन में भी काफी समय तक विजिबिलिटी बुरी तरह से प्रभावित है। फिलहाल यह 10 जनवरी से यह पूरी तरह से एक्टिवेट होगा और बारिश के आसार हैं। इसके बाद वर्तमान स्थिति से राहत मिल सकेगी। हालांकि शनिवार को दिन में विजिबिलिटी के मामले में काफी राहत रही। श्री गुरु रामदास इंटरनेशनल एयरपोर्ट स्थित मौसम विभाग के सेंटर प्रभारी ( वैज्ञानिक डी.) शशांक वर्मा कहते हैं कि डब्ल्यूडी हमेशा एक्टिव रहता है। कमोबेश, सर्दियों की बात करें तो गुरु नगरी में जनवरी में सबसे अधिक सर्दी पड़ती है। इस साल जनवरी की बात करें तो फिलहाल अभी यह पहले के मुकाबले 50 फीसदी कमजोर है। यही कारण है िक इसका असर नहीं दिख रहा है और धुंध तथा शीतलहर का आलम है। इसके चलते जहां सर्दी अधिक महसूस हो रही है वहीं विजिबिलिटी भी काफी हद तक प्रभावित चल रही है। शशांक वर्मा धुंध के कारण दिल्ली एयरपोर्ट से अमृतसर के श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट आने वाली कई फ्लाइट कैंसिल रही। इसके कारण अमृतसर आने वाले यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा। परमिंदर िसंह ने बताया िक उनकी दिल्ली से अमृतसर 8.20 बजे फ्लाइट थी, जो धुंध के कारण कैंसिल हो गई। जिसके बाद उन्होंने सोचा कि दोपहर में मौसम सही हो जाएगा। इसलिए उन्होंने दोपहर को 1.40 बजे आने वाले फ्लाइट की टिकट बुक की। पहले तो वह 11 बजे हर फ्लाइट देरी से जाने की सूचना मिल रही थी।
लेकिन उसके बाद सभी फ्लाइट कैंसिल की सूचना मिली। इससे वह बहुत परेशान हुए। उन्हें स्पेशल गाड़ी करके दिल्ली से अपने घर अमृतसर आना पड़ा। वहीं शनिवार को कुछ समय के लिए धूप भी खिली इसके चलते दिन के पारे में 0.4 और रात वाले में 0.1 डिग्री की बढ़त रही लेकिन ठिठुरन बरकरार रही। मौसम विभाग के मुताबिक शनिवार को दिन का पारा 17.0 और रात का 7.3 डिग्री रहा, जबकि शुक्रवार को उक्त क्रम में 16.4 और 7.2 डिग्री था। पूर्वानुमान के मुताबिक रविवार और सोमवार को मौसम खराब हो सकता है और बूंदाबांदी भी हो सकती है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (डब्ल्यूडी) अर्थात पश्चिमी विक्षोभ यह भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी इलाकों में सर्दियों के मौसम में आने वाला ऐसा तूफान है जो उत्तर, भारत, पाकिस्तान, नेपाल से गुजरते हुए इनके दायरे में आने वाले वायुमंडल की ऊंची तहों में भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर, काला सागर आदि से नमी लाता है। इसके चलते हवा के ऊपरी भाग में चक्रवाती हवा का घेरा बनता है, जो अगर मजबूत होता है तो बारिश होती है और हवा चलती है। इसके कारण धुंध छंटती है और पारा बढ़ता है, नतीजतन सर्दी कम होती है।


