मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश की 40 प्रतिशत आबादी को ईआरसीपी-पीकेसी लिंक परियोजना से पेयजल व सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। शेखावाटी क्षेत्र में यमुना जल लाने के लिए एमओयू किया गया है। उदयपुर में देवास योजना के माध्यम से जल उपलब्धता तय की जा रही है। वहीं माही बांध से बांसवाड़ा-डूंगरपुर को पेयजल व सिंचाई के लिए योजना शुरू की गई है। मुख्यमंत्री शनिवार को डूंगरपुर के खड़गदा में नदियों के संरक्षण व संवर्धन हेतु आयोजित श्रीरामकथा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर जन भागीदारी से जल संचय का अभियान शुरू किया गया है। प्रदेश के 40 हजार गांवों में जल संचय के कार्य किए जा रहे हैं। पीएम मोदी आम आदमी को पानी उपलब्ध कराने के लिए नदियों को जोड़ने का काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि खड़गदा व आस-पास के क्षेत्र के ग्रामीणों ने 9 महीने की कड़ी मेहनत और दृढ़संकल्प से एक किलोमीटर के दायरे में मोरन नदी को चौड़ा और गहरा कर जल की उपलब्धता बढ़ाकर अभूतपूर्व कार्य किया है। पारम्परिक जल स्रोतों का संरक्षण जरूरी है
मुख्यमंत्री ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि सभी को मिलकर गांवों में उपलब्ध पेयजल के पारंपरिक स्रोतों कुएं, तालाब, बावड़ी, नदी आदि के संरक्षण के लिए सहभागिता से काम करना चाहिए, ताकि हम इस पीढ़ी और आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करा सकें। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से खड़गदा वासियों ने प्रदेश को यह संदेश दिया है कि स्थानीय पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाना बहुत आवश्यक है। प्रवासी राजस्थानियों का सहयोग सीएम ने कहा कि पीएम मोदी व केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कर्मभूमि से जन्मभूमि कार्यक्रम की पहल की है। इसमें प्रवासी राजस्थानियों द्वारा गांवों में भू-जल रिचार्ज हेतु सहयोग दिया जा रहा है। सरकार जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक नल से जल पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इस मिशन के तहत डूंगरपुर जिले में लगभग 77 हजार कनेक्शन तथा 93 प्रतिशत स्कूलों में नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं। जलशक्ति मंत्रालय देगा खड़गदा गांव को विशेष स्थान
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नदियों को जोड़ने के सपने को साकार करते हुए राजस्थान और मध्य प्रदेश की नदियों को जोड़ने की ईआरसीपी पीकेसी लिंक परियोजना को मंजूरी दी है। लगभग 70 हजार करोड़ रुपए लागत की इस परियोजना में 90 प्रतिशत अंशदान केंद्र सरकार और पांच-पांच प्रतिशत अंशदान मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकार देंगी। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद राज्य में पानी की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के तहत जन सहयोग से राजस्थान के 40 हजार गांवों में वाटर रिचार्ज के लिए बोरवेल खोदे जाएंगे। पाटिल ने कहा कि जल शक्ति मंत्रालय के पोर्टल पर कैच द रैन अभियान में खड़गदा गांव के इस प्रयास को विशेष स्थान दिया जाएगा।


