मेहंदीपुर बालाजी स्थित रामेष्ट वेद संस्कृत गुरुकुलम् में गीता जयंती के अवसर पर वैदिक परंपरा और अध्यात्म से ओतप्रोत विशेष आयोजन सम्पन्न हुआ। गुरुकुल के बालकों ने सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का वाचन कर उनके आध्यात्मिक एवं नैतिक संदेशों का अर्थ समझा। गुरुकुल के आचार्यों द्वारा बालकों को गीता के कर्मयोग, ज्ञानयोग, और भक्तियोग के सिद्धांतों का सरल एवं सारगर्भित विवेचन कराया गया, जिसके माध्यम से बच्चों ने समाज के प्रत्येक वर्ग तक गीता का स्वच्छ और प्रेरणादायी संदेश पहुँचाने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने निश्चय किया कि वे वेदांत दर्शन और श्रीकृष्ण उपदेश को अपने जीवन में आत्मसात कर आदर्श नागरिक बनने का मार्ग अपनाएंगे । महंत ने दिया संदेश इस अवसर पर मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज का प्रेरणापूर्ण संदेश भी विद्यार्थियों तक पहुंचाया गया। महंत जी ने कहा कि- “जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के मन से संशय और अज्ञान दूर कर उसे धर्मपरायण कर्मपथ पर अग्रसर किया, उसी प्रकार आज का युवा भी आधुनिक युग का अर्जुन है। गीता का ज्ञान आज भी उतना ही प्रासंगिक, प्रभावी और मार्गदर्शक है।” उन्होंने बच्चों को आह्वान किया कि वे गीता के संदेश को आत्मसात कर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें। गुरुकुल परिसर में हुए इस आयोजन ने बालकों में वैदिक सांस्कृतिक जागरण, आध्यात्मिक ज्ञान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को और अधिक मजबूत किया। गुरुकुलम् निदेशक डॉ. घनश्याम हरदेनियां कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प एवं मंगल प्रार्थना के साथ हुआ।


