शाजापुर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट कार्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान दो अलग-अलग समस्याओं से जुड़े ज्ञापन सामने आए हैं। इनमें एक ओर मंदिरों की कृषि भूमि के फसल नुकसान मुआवजे की मांग उठी, वहीं दूसरी ओर डूंगरगांव में मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त किया। पुजारी संघ ने दिया ज्ञापन पुजारी संघ तहसील शाजापुर ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर बताया कि तहसील शाजापुर के अंतर्गत मंदिरों की कृषि भूमि पर हुए फसल नुकसान का मुआवजा अभी तक संबंधित कृषक पुजारियों को नहीं मिला है। जबकि, शाजापुर जिले की अन्य तहसीलों में यह मुआवजा पहले ही वितरित किया जा चुका है। संघ ने कहा कि मुआवजे के अभाव में पुजारियों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। संघ ने यह भी बताया कि इस संबंध में पूर्व में भू-तहसीलदार को आवेदन दिया गया था और कार्रवाई का आश्वासन भी मिला था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। पुजारी संघ ने कलेक्टर से शीघ्र मुआवजा भुगतान के निर्देश जारी करने की मांग की है। डूंगरगांव के ग्रामीणों ने मूलभूत सुविधाओं की मांग की वहीं, मोहन बड़ोदिया तहसील की ग्राम पंचायत हरियाणी के डूंगरगांव के ग्रामीणों ने गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर एक आवेदन दिया। ग्रामीणों ने बताया कि करीब 1000 की आबादी वाले इस गांव में कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में न तो आवास की पर्याप्त सुविधा है और न ही पानी निकासी के लिए नाले का निर्माण किया गया है। मुक्तिधाम तक पहुंचने के लिए भी कोई पक्का रास्ता नहीं है, जिससे लोगों को परेशानी होती है।गांव के बीच से गुजरने वाले एक बड़े नाले में लगातार गंदा पानी भरा रहता है। इससे दुर्गंध फैलती है और बीमारियों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कई मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।ग्रामीणों ने नाले से अवैध रेत खनन का आरोप भी लगाया और कहा कि शिकायतें करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे आगामी चुनावों में मतदान का बहिष्कार करेंगे।


