बारां में एनएसयूआई ने समर्थन मूल्य पर कृषि उपज खरीद केंद्रों पर किसानों को आ रही विभिन्न समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने इन समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष कशिश धाकड़ ने बताया कि खरीद केंद्रों पर स्टाफ द्वारा मनमानी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेमौसम बारिश के कारण खराब हुई सोयाबीन की फसल को पुरानी उपज बताकर खरीदने से मना किया जा रहा है, जिससे किसानों को परेशानी हो रही है। किसानों को गुमराह करने का आरोप धाकड़ ने बताया कि किसानों को 40 क्विंटल उपज खरीदने का संदेश मिलता है, लेकिन खरीद केंद्र पर केवल 15 क्विंटल ही तोला जा रहा है। शेष उपज को ‘खराबा’ बताकर छोड़ दिया जाता है, जिसकी जानकारी किसानों को पहले से नहीं दी जाती। इससे किसान गुमराह हो रहे हैं। संगठन ने यह भी बताया कि खरीद केंद्रों पर फिंगरप्रिंट अनिवार्य होने के कारण बुजुर्ग या शारीरिक रूप से अक्षम किसान स्वयं उपस्थित नहीं हो पाते, जिससे उनकी उपज नहीं खरीदी जा रही है। इसके अलावा, केंद्रों पर तोल के लिए पर्याप्त लेबर नहीं है, और किसानों को अपने खर्च पर मजदूर लाने पड़ते हैं, जबकि उनसे लेबर शुल्क भी वसूला जा रहा है। एनएसयूआई ने भाजपा सरकार को किसान विरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार की मंशा किसानों की उपज खरीदने की नहीं है। किसानों को डीएपी और यूरिया भी नहीं मिल पा रहा है, और उन पर जबरदस्ती अटैचमेंट थोपे जा रहे हैं। बिजली की कमी और फसलों के उचित दाम न मिलने से पूरे क्षेत्र के किसानों में भारी रोष है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इन समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं किया गया, तो किसान सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस दौरान गिरिराज नागर खैराली, सिद्धार्थ नागर फतेहपुर सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।


