राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक गोल बाजार ने बदलते समय और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अपने ग्राहकों के लिए होम डिलीवरी सेवा शुरू करने का फैसला किया है। अब लोग घर बैठे ही यहां से किराना, कपड़ा, पूजा सामग्री से लेकर स्वदेशी उत्पाद तक मंगा सकेंगे। खास बात यह है कि अधिकांश सेगमेंट में न्यूनतम खरीद की कोई सीमा नहीं रखी गई है। करीब 6 एकड़ में फैले इस बाजार में लगभग 1000 दुकानें हैं। यहां जन्म से लेकर विवाह और मृत्यु संस्कारों तक के सारे सामान एक ही जगह उपलब्ध रहते हैं। यहां किराना, अनाज, मसाले, कपड़ा और पूजा सामग्री, जड़ी-बूटियां (यहां यह पूरे शहर में सबसे ज्यादा मिलती हैं), लोहे के बर्तन व अन्य सामान, मिठाई, पेटी, पटाखे के अलावा हंडी पसरा, मिट्टी के बर्तन, लोहे की वस्तुएं, पर्रा, तिल्ली लड्डू, मुर्रा लड्डू, गुड़, पापड़ी, फलाहारी चुना-मुर्रा स्वदेशी उत्पाद मिलते हैं। जानिए… गोल बाजार का इतिहास गोल बाजार लगभग 200 साल पुराना है। इसे भोसले राजाओं ने बनवाया था। अंग्रेज इसे मित्र बाजार के नाम से जानते थे। पहले यहां व्यापारी घोड़ों और बैलगाड़ियों से आया करते थे। गोलाकार बनावट की वजह से इसका नाम गोल बाजार पड़ा। पहले यहां के गुंबद पर 26 जनवरी और 15 अगस्त को नगर निगम द्वारा ध्वजारोहण भी किया जाता था। इसलिए… कारोबारियों को बढ़ानी पड़ी सुविधा वर्तमान में गोल बाजार में पार्किंग की समस्या, जगह की कमी, प्रसाधन की दिक्कत और अतिक्रमण के कारण लोग यहां आना कम पसंद कर रहे हैं। जबकि यह बाजार शहर का सबसे पुराना और किफायती मूल्यों वाला प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। ग्राहकों से पुराने संबंध बनाए रखने के लिए मर्चेंट एसोसिएशन और गोल बाजार व्यापारी संघ ने होम डिलीवरी की पहल की है। व्यापारी संगठन मानते हैं कि इससे ग्राहकों को बेहतर सुविधा मिलेगी और उनका भरोसा भी बना रहेगा।


