कांकेर में शिव महापुराण कथा के छठवें दिन उमड़ी भीड़:पं. प्रदीप मिश्रा ने बताया इंसान को पहचानने का तरीका

कांकेर जिले के कच्चे क्षेत्र में चल रही शिव महापुराण कथा के छठवें दिन भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा स्थल पर रात के दौरान भी भक्त पंडालों में रुककर भजन-कीर्तन करते रहे। कथा के छठवें दिन पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने प्रवचन में इंसान को पहचानने के तरीके पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शेर, कुत्ता, हाथी या बिच्छू जैसे जानवरों को उनके स्वभाव से पहचाना जा सकता है, जैसे शेर हमला करेगा या बिच्छू डंक मारेगा। लेकिन इंसान को पहचानना कठिन है। उन्होंने बताया कि व्यक्ति को कितना भी धन या सहायता दी जाए, वह फिर भी निंदा कर सकता है या नुकसान पहुंचा सकता है। पंडित मिश्रा ने वर्तमान में ‘रील’ के चलन का जिक्र करते हुए कहा कि कोई अच्छी बात या काम वायरल नहीं होता, जबकि किसी बाबा या नेता की छोटी सी गलती भी तेजी से फैल जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया में लोग अच्छाई से ज्यादा बुराई को देखते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो लोग गौमाता की सेवा कर रहे हैं या सनातन धर्म के लिए कार्य कर रहे हैं, उन्हें भी अक्सर ताने सुनने पड़ते हैं और उनकी बुराई की जाती है। पंडित मिश्रा ने भगवान महादेव का उदाहरण दिया, जिनकी बुराई करने वालों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि भोलेनाथ ने सभी के कल्याण के लिए विषपान किया और नीलकंठ बनकर पूजनीय हो गए। उन्होंने भक्तों को संदेश दिया कि कोई कितनी भी बुराई करे, उस पर ध्यान न दें और अपने काम में आगे बढ़ते रहें। उन्होंने सभी का कल्याण करने वाले शिव को याद करने और ‘एक लोटा जल सभी समस्याओं का हल’ मंत्र के साथ जल चढ़ाते रहने का आह्वान किया।

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